Saturday, 31 December 2016

swami akhandananda sarswati

संसार से छूटने का एक मात्र उपाय 



राजा प्राचीनबर्हि ने नारदजी से पूछा की महाराज, मनुष्य कर्म तो एक शरीर से करे और उसका फल उसे दुसरे शरीर में भोगना पड़े, जिसने कर्म किया उसको तो फल मिले नही जिसने कर्म नही किया उसको फल मिले तो यह कैसे न्यायसंगत हो सकता है?


इस पर नारदजी ने बताया की कर्म स्थूल शरीर से नही होता, लिंग   शरीर ही उसका कर्ता होता है. जबतक अध्यास, भ्रम नही मिट जाता और अपनी अद्वितीयता का पूर्णता का बोध नहीं हो जाता तब तक मनुष्य बंधन में रहता है. इसलिए इससे उबरने का उपाय महात्माओ का संग है. 


महात्माओ के मध्य में बैठने पर देखोगे की उनके श्रीमुख से भगवचरित्र की अंर्तमयी  बहती  रहती है. पहले तो वे भगवान के अमृतमय चरित्र का रसास्वादन स्वयं करते है. उनको बोलकर भगवत्चरित्र प्रकट करने की आवश्यकता नहीं रहती. फिर भी भगवन का चरित्र ऐसा  मधुर है, ऐसा रसमय है की वह उनके भीतर समता नहीं है और उन मौनी महात्माओ को भी मुखर बना देता है. 


इसलिए अपने कानो को उस कथा की नदी में डुबो दो और उसको पीओ. जो लोग उस कथामृत का पान करने लगते है, उनकी प्यास बुझती नही है वे पीते जाते है. उनकी तृप्ति होती जाती है लेकिन उनकी प्यास भी बढ़ती जाती है.


जो लोग इस रस पान के आदि हो जाते है उनकी भूख-प्यास इसके आनंद में गायब हो जाती है, लुप्त हो जाती है. उनके भविष्य का कोई भय नहीं होता, भूत का कोई शोक नहीं होता और वर्तमान का  नहीं होता. 


इसलिए संसार की जो प्रडाली व् परम्परा चल रही है, जिसमे मैं मेरा करके यह जीव आबद्ध है, उससे छूटने का एक मात्र उपाय सत्संग है. 

(ब्रह्मलीन श्री स्वामी अखंडानंद सरस्वती जी महाराज के प्रवचनों से)

Thursday, 29 December 2016

go raksha abhiyan

गौ रक्षा के लिए क्या करे???

गोवध भारत का कलंक है गौरक्षा हेतु हमे नीचे लिखे बिन्दुओ पर कार्य करना आज से ही शुरू करना 

1) गौ संरक्षण  बूढी, बेकाम गायो के लिए गोसदनों की स्थापना करना व् कराना चाहिए जिनमे गाय  के अपनी मौत मरने के समय तक उसके लिए आवश्यक चारे-पानी और चिकित्सा की व्यवस्था हो. 

नस्ल न बिगड़े इस दृष्टि से वहां गायो को बरदाया न जाय 

2)  गाय की नस्ल सुधार का प्रयत्न करना, जिससे गाये प्रचुर दूध देनेवाली हो, बैल मजबूत हो और  मरे हुए गाय बैलो की अपेक्षा जीवित गाय बैलो का मूल्य  बढ़ जाय.  

  इस प्रकार गाय को आर्थिक स्वावलम्बी बनाना चाहिए 

3)  जिन शहरो में गाय रखने के लिए पर्याप्त स्थान नही है,   जहा   कृत्रिम व् निर्दय उपायो से दूध निकल जाता  है, बछड़े मरने दिए जाते है, दूध सूखते ही गाय कसाई के हाथ बेच दी जाती है, क़ानूनी प्रतिबन्ध होने पर म्युनिसिपलिटी की सीमा से बाहर ले जाकर गाय मार दी जाती है, वहां  जबतक ये बाते दूर न हो तब तक गायो को बाहर  कतई न जाने दिया जाय. स्थान की सुविधा कराना तथा सरकार द्वारा ऐसी व्यवस्था कराना जिसमे गायो को   दिए  ये सब कष्ट दूर हो 


4)  गाय को भरपेट चारा-दाना मिले इसके लिए व्यवस्था करना गोचर भूमि को मुक्त करवाना। नए-नए चारे की खेती करना और कराना चाहिए 


5)  वर्तमान गोशालाओ का सुधार करना और  जो दया भाव  से केवल बूढी अपँग गायो के लिए खोले गए  है उन्हें डेरी  फार्म न बनाकर उसी  काम के लिए रहने देना चाहिए 


6)  गायो का गर्भाधान, विशेष दूध  देने वाली गौ के पुत्र बलवान तथा श्रेष्ठ जाती के देशी सांड  से ही कराना. अच्छी नस्ल के देशी सांडो  का निर्माण तथा विस्तार करना, बूढ़े सांडो से तथा जर्सी सांडो से गर्भाधान का काम कतई न लिया जाना चाहिए 


7)  कसाईखानों में मारी हुई गायो  चमड़े इत्यादि से बनी  बस्तुए-जूते, बटुए, बेल्ट, आदि का व्यवहार न करने की शपथ करना व् कराना चाहिए 


8)  गोवध में सहायक चमड़े, मांस, आदि का व्यापार जिससे गोवध होता है बिलकुल न करना 


9)  गौशालाओ के द्वारा भी मरे हुए पशुओ के चमड़े, हड्डी, सींग, केश आदि से अर्थ उत्पन्न  करना और उसे बूढी अपँग गायो की सेवा में लगाना चाहिए 


10)  ट्रेक्टरो का व्यवहार न करके या कम से कम करके हल जोतने का काम केवल  तथा रासायनिक खाद का उपयोग न करके गोबर, गोमूत्र की खाद से ही काम लेना और इसकी उपयोगिता का प्रतिपादन करना चाहिए 


11)  यथासाध्य गाय के ही दूध, दही, घी का व्यवहार करना और कम से कम एक गाय का पालन करना चाहिए 


13)  गौशालाओ को आत्मनिर्भर बनाने हेतु गोबर व् गौमूत्र तथा पंचगव्य से बनने वाले उत्पादों का निर्माण कर गौशालाओ को आत्मनिर्भर बनाना चाहिए. 








Sunday, 25 December 2016

shuddh desi ghee

जब गौवंश ही नहीं रहेगा तो शुद्ध गौ घृत कहा से आएगा? 

आज भारत वर्ष मे ही नहीं पूरे विश्व मे सभी मानव सुखी है पर जीव मात्र की माता कहलाने का अधिकार रखने वाली वेदों द्वारा पूज्यनीय, देवताओं को भी भोग और मोक्ष प्रदान करने की शक्ति रखने वाली गौ माता आज सड़कों पर मल, गन्दगी, प्लास्टिक खाने को मजबूर है |

भगवान श्री कृष्ण की कृपा से आज भी भारत वर्ष मे ही नहीं पूरे विश्व मे कुछ ऐसे पुण्यवान, भामाशाह और अपनी माँ के कोख को धन्य करने वाले गौ भक्त भी है, जिनके सहयोग से आज भी लाखो गौवंश गौशालाओं मे, किसानों के यहाँ, अपने घर पर ही सुरक्षित है | क्या ये गौभक्त, जिनकी वजह से पूरी सृष्टी का संतुलन बना हुआ है, आगे भी इसी प्रकार गौ – सेवा में संलग्न रह सकेंगे ?
शेष मानव जाति को जिनको परमात्मा ने सोचने के लिए बुद्धि दे रखी है का भी कर्तव्य बनता है कि इस गो संवर्धन को उठाने मे, इस राम सेतु को बनाने मे ग्वाल -बालो एवं गिलहरी की तरह थोडा – थोडा यथा योग्य योगदान दे | जब हम थोडा-थोडा योगदान देंगे तो हम सभी गौभक्तों के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं रहेगा |
शास्त्र कहता है — गौ भक्त जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त होती है | स्त्रियों मे भी जो गौओं की भक्त है, वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती है | पुत्रार्थी पुत्र पाता है, कन्यार्थी कन्या, धनार्थी धन, धर्मार्थी धर्म, विद्यार्थी विद्या और सुखार्थी सुख पा जाता है | विश्व भर मे कही भी गौभक्त को कुछ भी दुर्लभ नहीं है | यहाँ तक की मोक्ष भी बिना गाय के पूंछ पकडे संभव नहीं | वैतरणी पर यमराज एवं उसके गण भयभीत होकर गाय के पूंछ पकडे जीव को प्रणाम करते है |
देवताओं और दानवो के द्वारा समुद्र मंथन के वक्त ५ गायें उत्पन्न हुई, इनका नाम था- नंदा, सुभद्रा, सुरभि, सुशीला और बहुला | ये सभी गायें भगवान की आज्ञा से देवताओं और दानवों ने महर्षि जमदग्नि, भारद्वाज, वशिष्ट, असित और गौतम मुनि को समर्पित कर दीं | आज जितने भी देशी गौवंश भारत एवं इतर देशो मे है, वह सब इन्ही ५ गौओं की संताने है और हमारे पूर्वजो एवं ऋषियों का यह महाधन है | क्या हम सिर्फ गोत्र बताने के लिए ही अपने ऋषियों की संताने हैं? उनकी सम्पति गौ धन को बचाना हमारा कर्तव्य नहीं |
आज भारत वर्ष मे ही करोड़ों लोग सुबह – शाम देवालयों मे माथा टेक कर भगवान से मनोकामनाएँ मांगते है, पर इन मे से लाखों लोगो को यह तक भी मालूम नहीं है की जिस देवता से वे याचना कर रहे है उन्हें कुछ भी दे देने की शक्ति तभी आएगी जब हवन द्वारा अग्नि के मुख से देवताओं तक शुद्ध गौ घृत पहुंचेगा | जब हम हवन में गाय के घी से मिश्रित चरू देवताओं को अर्पण करते है | उस उत्तम हविष्य से देवता बलिष्ट एवं पुष्ट होते है | जब देवता शक्तिशाली होगा तभी अपनी शक्ती के बल पर आपकी-हमारी मनोकामनाएं पूरी करने मे समर्थ होंगे | पर जब गौवंश ही नहीं रहेगा तो शुद्ध गौ घृत कहा से आएगा? और शुद्ध गौ घृत नहीं होगा तो हवन कहा से होगा? और हवन नहीं होंगे तो देवता पुष्ट कैसे होंगे? और देवता पुष्ट नहीं होंगे तो शक्तिहीन देवता मनोकामनाएं पूर्ण कैसे करेँगे ? आज हम लोग पेड़ लगा देते है पानी खाद नहीं डालेंगे तो फल कहा से लगेंगे? यह प्रकृति के नियम के विरुद्ध है |
आज जितने भी कथाएं होती है, यज्ञ, अनुष्टान होते हैं, जप-तप होते है उनमें नाम-जप का कुछ प्रभाव पड़ता हो पर अंत मे जो यज्ञ होता है वह सफल कितने होते है यह राम को ही मालूम | क्योंकि इन यज्ञों मे शुद्ध गौ घृत का उपयोग नहीं के बराबर होता है | आज भारत वर्ष मे पूर्व की अपेक्षा यज्ञ, धर्म, कर्म अधिक हो रहे है पर फल नहीं मिलता, यज्ञ सफल नहीं होते, क्या कारण है? इसके मूल मे यही है की जिस धरती पर गौ, ब्राहमण, साधू-संत, स्त्री दुखी होते है वहां पर पुण्य कर्म फल नहीं देते

रोजगार के बढ़ते अवसर



भारतीय मनीषियों ने गाय के महत्व को बहुत पहले पहचाना लिया था| उन्होंने पाया कि गाय का  दूध स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक है,बैलों से खेती, आवागमन के साधन एवं माल वाहन, गोमूत्र से खाद, कीटनाशक एवं औषिधिय उपयोग तथा भूमि की उत्पादकता बढ़ाने हेतु गोबर खाद ही उत्तम है जो आधारित कृषि की ग्राम स्वालंबन के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है| 

उन्होंने गौ की महिमा का बखान करते हुए गाय को माता का स्थान दिया| उन्होंने गाय को धर्म में इस तरह सम्मिलित कर  दिया की भारत के उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम क्षेत्र में अनेक धार्मिक मत-मतोतरों के उपरांत  भी गाय को सभी ने पूज्यनीय माना|


भगवान श्रीकृष्ण भी गाय की सेवा करके गोपाल, गोविन्द आदि नामों से पुकारे गये| जब तक गौ आधारित स्वावलंबी खेती होती रही तब तक भारत विकसित धनवान राष्ट्र रहा, यहाँ की सम्पदा के लालच में वेदेशी वर्षो तक भारत पर आक्रमण करते रहे 

‪#‎गौधन के उपेक्षा के कारण‬ 


1. भैंस का ढूढ़ गाढ़ा व अधिक चिकनाई वाला होने से दूध व्यवसाय में भैंस के दूध को गाय के दूध पर वरीयता दी जाने लगी|
2. आवागमन के साधन बढ़ने से बैलों की उपयोगिता इस क्षेत्र में सीमित रह गई है|
3. ट्रेक्टरों के बढ़ते उपयोग से बैलों की उपयोगिता कृषि कार्यों में शनैः – शनै: घटती जा रही है|
4. रासायनिक खादों एवं कीटनाशक से गोबर, गोमूत्र के उपयोग में कमी आई है| 

इन सबका प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है| गाँव अब गौ आधारित स्वावलंबी नहीं रहे| उन्हें अपने समस्त कार्यों एवं कृषि आदानों के लिए शहर की ओर देखना  पड़ रहा है|

गाँव में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए तथा कृषकों की आय में वृद्धि के लिए हमें पुन: गौ आधारित स्वावलंबी कृषि की ओर वापस जाना होगा| बदले हुए हालात में आज कम से कम गाय के दूध का उत्पादन बढ़ाकर तथा गोबर व गौमूत्र की प्रयोग से रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर होने वाले खर्च व गौमूत्र के प्रयोग से रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को बचाकर ग्राम लक्ष्मी का पुन: आह्वान किया जा सकता है|

विभिन्न देशों की गायों के दूध उत्पादन के आंकड़ों को देखकर ऐसा लगा कि विकसित राष्ट्रों के गायों का प्रति व्यात दूध उत्पादन विकासशील देशों की गायों के प्रति बयात दूध उत्पादन से कई गुना अधिक है| 

उदाहरण के लिए इजरायल में 9000 लीटर, अमेरिका में 7000 लीटर, हॉलैंड एवं जर्मनी में 6000 लीटर, जापान में 3000 लिटर दूध एक गाय एक व्यात में देती है जबकि भारत की एक गाय का औसत दूध उत्पदान विकास का पैमाना है| 

पंजाब, गुजरात, की गायें अधिक दुधारू हैं, ये प्रदेश भी विकसित हैं| म. प्र. में मालवा, निमाड़, मुरैना का गौधन दुधारू है अत: इन क्षेत्रों का किसान भी सम्पन्न है| 

इससे स्पष्ट है कि एक ब्यात में गाय का दूध जितना अधिक होगा, उतना ही सम्पन्न किसान, प्रदेश और राष्ट्र होगा| कृषि क्षेत्र में अब यह स्थिति आ गई है कि उत्पादन अब लगभग स्थिर हो गया है| उतनी ही उपज प्राप्त करने के लिए अब आदानों पर अधिक व्यय करना पड़ता है| परिवार के आकार बढ़ने से अब जोत के आकार भी छोटे होते जा रहे हैं| 

ऐसी स्थिति में अब गौपालन ही एक ऐसा व्यवसाय बचा है जिसमें उत्पादन बढ़ाने की अपार संभावना है| अनुभव यह बतलाता है कि एक संकर गाय, औसत देखभाल में एक ब्यात्त में 1500 से 1800 लिटर दूध देती हैं जिसका मूल्य साधारण तथा एक एकड़ दो फसली क्षेत्र से प्राप्त उत्पादन के बराबर होता है| 

अत: किसान की आर्थिक हालत पता करने का यह भी एक पैमाना हो सकता है कि जिस किसा के पास जितनी दुधारू संकर गायें हैं, उसकी आमदनी उतनी ही एकड़ों में प्राप्त हो फसली क्षेत्र से प्राप्त आमदनी से होगी| 

आय  बढ़ाने के लिए‪ ‎गौपालन सर्वोत्तम साधन है‬ 

जहाँ तक भैंस से प्रतियोगिता का प्रश्न है, विश्व में सबसे अच्छी भैंस केवल भारत में ही है| उनका एक ब्यात का दूध उत्पादन 1200 से 1500 लिटर रही है|

 भैंस के दूध को बढ़ाने की क्षमता सीमित है, उसमें सूखे के दिन अधिक होते हैं तथा उसका प्रजनन मौसमी होता है, उसके रख्राव का खर्च भी अधिक होता है, इसलिए भैंस एक अच्छी दुधारू गाय की तुलना में लम्बे समय तक नहीं टिक पायगी|

अत: दूर दृष्टि से सोच कर गाय पालना ही लाभप्रद होगा||


सावधानियाँ‬ :-

गौपालन में लगे हुए उद्यमियों को निम्न बिंदूओं का ध्यान रखना आवश्यक है, अन्यथा लाभ में निरंतर कमी आती जाएगी|
क. प्रजनन
(अ) अपनी आय को अधिक दूध वाले सांड के बीज से फलावें ताकि आने वाली संतान अपनी माँ से अधिक दूध देने वाली हो| एक गाय सामान्यत: अपनी जिन्दगी में 8 से 10 बयात दूध देती हैं आने वाले दस वर्षों तक उस गाय से अधिक दूध प्राप्त होता रहेगा अन्यथा आपकी इस लापरवाही से बढ़े हुए दूध से तो आप वंचित रहेंगे ही बल्कि आने वाली पीढ़ी भी कम दूध उत्पादन वाली होगी| अत: दुधारू गायों के बछड़ों को ही सांड बनाएँ|

(आ) गाय के बच्चा देने से 60 से 90 दिन में गाय पुन: गर्भित हो जाना चाहिए| इससे गाय से अधिक दूध, एवं आधिक बच्चे मिलते हैं तथा सूखे दिन भी कम होते है|

(इ) गाय के फलने के 60 से 90 दिन बाद किसी जानकार पशु चिकित्सा से गर्भ परिक्षण करवा लेना चाहिए| इससे वर्ष भर का दूध उत्पादन कार्यक्रम तय करने में सुविधा होती है|

(ई) गर्भावस्था के अंतिम दो माह में दूध नहीं दूहना चाहिए तथा गाय को विशेष आहार देना चाहिए| इससे गाय को बच्चा जनते वक्त आसानी होती है तथा अगले बयात में गाय पूर्ण क्षमता से दूध देती है|

ख. आहार
(अ) दूध उत्पादन बढ़ाने तथा उसकी उत्पादन लागत कम करने के लिए गाय की सन्तुलित आहार देना चाहिए| संतुलित आहार में गाय की आवश्यकता के अनुसार समस्त पोषक तत्व होते हैं, वह सुस्वाद, आसानी से पचने वाला तथा सस्ता होता है|

(आ) दूध उत्पादन से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए, पशु को बारह मास पेट भर हरा चारा खिलाएं| इससे दाने का खर्च भी घटेगा तथा गाय का नियमित प्रजनन भी होगा|

(इ) गाय को आवश्यक खनिज लवण नियमित देंवे|

(ई) गाय को आवश्यक चारा- दाना- पानी नियत समय के अनुसार देवे| समय के हेर-फेर से भी उत्पादन प्रभावित होता है|

ग. रोग नियंत्रण
(अ) संक्रामक रोगों से बचने के लिए नियमित टिके लगवाएं|

(आ) बाह्य परिजीवियों पर नियंत्रण रखे| संकर पशुओं में तो यह अत्यंत आवश्यक है|

(इ) आन्तरिक परजीवियों पर नियंत्रण रखने के लिए हर मौसम परिवर्तन पर आन्तरिक परजिविनाशक दवाएँ दें|

(ई) संकर गौ पशु, यदि चारा कम खा रहा है या उसने कम दूध दिया तो उस पर ध्यान देवें| संकर गाय देशी गाय की आदतों के विपरीत बीमारी में भी चारा खाती तथा जुगाली भी करती है|

(उ) थनैला रोग पर नियंत्रण रखने के लिए पशु कोठा साफ और हवादार होना चाहिए| उसमें कीचड़, गंदगी न हो तथा बदबू नहीं आना चाहिए| पशु के बैठने का स्थान समतल होना चाहिए तथा वहाँ गड्ढे, पत्थर आदि नुकीले पदार्थ नहीं होना चाहिए| थनैला रोग की चिकित्सा में लापरवाही नहीं बरतें|


गौवत्सों का पोषण‬ :-

गौवत्सों का पोषण सही तरीके से किया जाए तो वे 2.11 से 3 वर्षों की उम्र में गाय बन जायेंगे अन्यथा वे 4 से 5 साल की उम्र में गाय बनेंगे| यह स्थिति लाभप्रद नहीं हैं| 

गौवत्सों का पालन चिकित्सकों की राय से करें|
लेखा - पशु के दोध उत्पादन, दूध केने के दिन, सूखे दिन, दो बयात में अंतर, प्रजनन,उपचार आदि का भी लेखा- जोखा रखना चाहिए|

इससे पशु के मूल्यांकन में सहायता मिलती है तथा कम लाभप्रद या अलाभप्रद पशु के छंटनी आसानी से की जा सकती है|

इसके अतिरिक्त गोबर व गौमूत्र का युक्ति- युक्त उपयोग कर रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को बचाकर आमदनी बढ़ाई जा सकती है| दूध एक ऐसा पदार्थ है जो जितनी भी मात्रा में उत्पादित किया जावे उसे बाजार मिलना ही है|

जैसे- जैसे समृद्धि बढ़ेगी, वैसे-वैसे भोजन में दूध से बने पदार्थ की खपत बढ़ेगी ही|

अत: गौपालन को  पूर्णकालिक व्यवसाय के रूप में अपनाकर किसान बंधु अपनी आय बढ़ाकर रोजगार के नये द्वार खोल सकते हैं|

Saturday, 24 December 2016

Importance of Jaivik Panchgavya of Indian Cow

1. पंचगव्य
पंचगव्य , एक कार्बनिक उत्पाद विकास को बढ़ावा देने और संयंत्र प्रणाली में उन्मुक्ति प्रदान करने की भूमिका निभाने की क्षमता है। पंचगव्य नौ उत्पादों अर्थात के होते हैं। गाय के गोबर , गोमूत्र , दूध, दही , गुड़ , घी , केला, टेंडर नारियल और पानी। उपयुक्त रूप से मिलाया जाता है और इस्तेमाल किया, इन चमत्कारी प्रभाव है।
गाय के गोबर - 7 किलो

गाय घी - 1 किलो
सुबह और शाम के समय में ऊपर के दो मुद्दों को अच्छी तरह से दोनों मिक्स और 3 दिन के लिए रखना
गोमूत्र - 10 लीटर

जल - 10 लीटर
3 दिन के मिश्रण गोमूत्र और पानी और नियमित रूप से सुबह और शाम के समय में दोनों के मिश्रण के साथ 15 दिनों के लिए रखने के बाद । 15 दिनों के बाद निम्नलिखित मिश्रण और पंचगव्य 30 दिनों के बाद तैयार हो जाएगा।
गाय के दूध - 3 लीटर

गाय दही - 2 लीटर
टेंडर नारियल पानी - 3 लीटर
गुड़ - 3 किलो
12 नग - वैसे poovan केले ripened ।
2. तैयारी
उपर्युक्त सभी आइटम एक विस्तृत वाला मिट्टी के बर्तन, ठोस टैंक या प्लास्टिक से जोड़ा जा सकता कर सकते हैं ऊपर के आदेश के अनुसार । कंटेनर छाया में खुला रखा जाना चाहिए। सामग्री सुबह और शाम को दोनों दिन में दो बार उभारा जा रहा है। पंचगव्य शेयर समाधान 30 दिनों के बाद तैयार हो जाएगा। ( केयर भैंस उत्पादों मिश्रण करने के लिए नहीं लिया जाना चाहिए। गाय की स्थानीय नस्लों के उत्पादों विदेशी नस्लों की तुलना में शक्ति है कहा जाता है )। यह छाया में रखा है और अंडे और समाधान में कीड़ों के गठन बिछाने से houseflies को रोकने के लिए एक तार की जाली या प्लास्टिक मच्छर नेट के साथ कवर किया जाना चाहिए । गन्ने का रस उपलब्ध नहीं है, तो पानी की 3 लीटर में भंग गुड़ की 500 ग्राम जोड़ें।
भौतिक रसायन और पंचगव्य के जैविक गुण
Chemical             compositionpH                    :    5.45

EC dSm2          :   10.22
Total N (ppm)    :    229
Total P (ppm)    :    209
Total K (ppm)    :    232
Sodium            :    90
Calcium           :    25
IAA (ppm)        :    8.5
GA (ppm)           :    3.5

 Microbial Load

Fungi            :    38800/ml

Bacteria            :    1880000/ml
Lactobacillus        :    2260000/ml
Total anaerobes        :    10000/ml
Acid formers        :    360/ml
Methanogen            :    250/ml
पंचगव्य का भौतिक-रासायनिक गुणों वे लगभग सभी प्रमुख पोषक तत्वों, सूक्ष्म पोषक तत्वों और फसल के विकास के लिए आवश्यक विकास harmones (आई ए ए व जीए ) के अधिकारी हैं कि पता चला। खमीर और लैक्टोबैसिलस की तरह fermentative सूक्ष्मजीवों की प्रबलता कम पीएच , दूध के उत्पाद और उनके विकास के लिए सब्सट्रेट के रूप में गुड़ / गन्ने के रस के अलावा के संयुक्त प्रभाव के कारण हो सकता है।
जनसंख्या गतिशीलता और जीसी विश्लेषण में जैविक पता लगाने के सबूत के रूप में मध्यम से कम पीएच fermentative रोगाणुओं द्वारा कार्बनिक अम्ल के उत्पादन की वजह से था । लैक्टोबैसिलस इस तरह के अपने विकास के अलावा अन्य रोगजनक सूक्ष्मजीवों के खिलाफ प्रभावी रहे हैं जो कार्बनिक अम्ल, हाइड्रोजन पेरोक्साइड और एंटीबायोटिक दवाओं, के रूप में विभिन्न लाभकारी चयापचयों पैदा करता है। जीसी एमएस विश्लेषण फैटी एसिड होता है, alkanes , alconol और एल्कोहल के यौगिकों निम्नलिखित में हुई।
Fatty acids                        Alkanes                Alconol and Alcohols

Oleic acids                        Decane                Heptanol
Palmitic acid                        Octane                Tetracosanol
Myristic                            Heptane                Hexadecanol
Deconore                            Hexadecane            Octadeconol 
                                    
Deconomic                        Oridecane            Methanol, Propanol, Butanol and Ethanol
Octanoic          
Hexanoic          
Octadeconoic          
Tetradeconoic          
Acetic, propionic, butyric, caproic and valeric acids  
Kisanhelp.in खेती और कृषि मुद्दों से संबंधित मुद्दों का सामना कर रहे किसानों को कृषि तकनीक को हिन्दी में  समझने हेतु किसानों की मदद करने वाली वेबसाइट हैं ।   
वाणिज्यिक फसलों पर पंचगव्य के लाभदायक प्रभाव
.आम
अधिक महिला फूलों के साथ घने फूल लाती है

अनियमित या वैकल्पिक असर आदत अनुभवी नहीं है और नियमित रूप से फल के लिए जारी
कमरे के तापमान में 12 दिनों से रखते हुए गुणवत्ता को बढ़ाता है
स्वाद और सुगंध असाधारण रहे हैं
नीबू 
सतत फूल वर्ष दौर सुनिश्चित किया जाता है

फल मजबूत खुशबू के साथ plumpy हैं
शेल्फ जीवन में 10 दिनों के लिए बढ़ा दी है
केला
पुरुष कली निकाल दिया जाता है के बाद सिंचाई के पानी के साथ जोड़ने और छिड़काव के अलावा, 3 % समाधान (100 मिलीलीटर) झुंड के नौसैनिक अंत में बांध दिया गया था । गुच्छा आकार एक समान हो जाता है। एक महीने पहले फसल को देखा गया था। ऊपर और नीचे हाथ के आकार के समान रूप से बड़ा था।
हल्दी
22% से उपज बढ़ाता

अतिरिक्त लंबे उंगलियों
कम जल निकासी नुकसान सुनिश्चित करें
माँ और उंगली rhizomes के अनुपात संकरी
बदले में कीट और रोग भार को कम जो अजगर मक्खी , मकड़ी आदि के अस्तित्व में मदद करता है
माँ / बीज कंद के रूप में प्रीमियम कीमत के लिए बेचा
Curcumin सामग्री enriches
सब्जियां
18 % तक और ककड़ी की तरह कुछ मामलों में उपज बढ़ाने, उपज दोगुनी है

चमकदार और आकर्षक त्वचा के साथ पौष्टिक सब्जियां
विस्तारित शैल्फ जीवन
मजबूत स्वाद के साथ बहुत स्वादिष्ट
आम तौर पर पंचगव्य 30% स्तर ( पानी की 100 लीटर में 3 लीटर पंचगव्य ) में पत्ते का स्प्रे के रूप में सभी फसलों के लिए सिफारिश की है।
खुराक
स्प्रे प्रणाली
3% समाधान की जांच उच्च और कम सांद्रता की तुलना में सबसे अधिक प्रभावी हो पाया था। पानी की हर 100 लीटर पंचगव्य से तीन लीटर सभी फसलों के लिए आदर्श है। 10 लीटर क्षमता की बिजली स्प्रेयर 300 मिलीग्राम / टैंक पड़ सकता है। बिजली स्प्रेयर के साथ छिड़काव करते हैं, तलछट फ़िल्टर किए जा रहे हैं और हाथ संचालित स्प्रेयर के साथ छिड़काव करते समय, उच्च ताकना आकार के साथ नोक इस्तेमाल किया जाना है।
फ्लो सिस्टम
पंचगव्य का समाधान या तो ड्रिप सिंचाई या प्रवाह सिंचाई के माध्यम से प्रति हेक्टेयर 50 लीटर में सिंचाई के पानी के साथ मिलाया जा सकता है
बीज / अंकुर उपचार
पंचगव्य का 3% समाधान बीज लेना या बोने से पहले अंकुरों डुबकी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 20 मिनट के लिए भिगोने के लिए पर्याप्त है। गन्ने की हल्दी, अदरक की rhizomes और सेट लगाने से पहले 30 मिनट के लिए भिगो जा सकता है।
बीज भंडारण
पंचगव्य समाधान के 3% सुखाने और उन्हें भंडारण से पहले बीज डुबकी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
दौरा
पूर्व फूल चरण
15 दिन में एक बार, दो स्प्रे फसलों की अवधि पर निर्भर करता है
फूल और फली सेटिंग मंच
एक बार में 10 दिन, दो स्प्रे
फल / फली परिपक्वता चरण
फली परिपक्वता के दौरान एक बार
जैस्मीन
असाधारण खुशबू और खुशबू कली कीड़ा की कोई घटना साल भर में सतत फूल
अमरूद
हायर टीएसएस शेल्फ जीवन 5 दिनों के लिए बढ़ा दी है
पंचगव्य का प्रभाव
पत्ता
पंचगव्य के साथ छिड़काव पौधों सदा ही बड़ा पत्तियों का उत्पादन और सघन चंदवा का विकास। संश्लेषक प्रणाली अधिकतम चयापचयों और photosynthates के संश्लेषण, सक्रिय करने के लिए बढ़ाया जैविक दक्षता के लिए सक्रिय है।
तना
ट्रंक मजबूत और परिपक्वता के लिए अधिकतम फल ले जाने में सक्षम हैं जो पक्ष शूटिंग, पैदा करता है। शाखाओं में बंटी अपेक्षाकृत अधिक है।
जड़ें
पक्ष विपुल और घना है। इसके अलावा वे एक लंबे समय के लिए नए सिरे से रहते हैं। गहरी परतों में फैला हुआ है और बढ़ने की जड़ों को भी मनाया गया। ऐसे सभी जड़ों पोषक तत्वों और पानी का अधिकतम सेवन मदद करते हैं।
प्राप्ति
भूमि संस्कृति का अकार्बनिक सिस्टम से जैविक खेती करने के लिए परिवर्तित किया जाता है, सामान्य परिस्थितियों में उपज अवसाद हो जाएगा। पंचगव्य की प्रमुख विशेषता भूमि पहले ही साल से जैविक संस्कृति के लिए अकार्बनिक सांस्कृतिक प्रणाली से बदल जाती है जब सभी फसलों की उपज स्तर को बहाल करने की इसकी क्षमता है। फसल न केवल सब्जियां, फल और अनाज की शेल्फ जीवन को बढ़ाता है, लेकिन यह भी स्वाद में सुधार सभी crops.It में 15 दिनों से उन्नत है। कम करने या महंगा रासायनिक आदानों की जगह तक, पंचगव्य उच्च लाभ सुनिश्चित करता है और ऋण से जैविक किसानों को मुक्त।
सूखा साहस
एक पतली तेल फिल्म के पत्तों पर गठन किया है और इस तरह पानी के वाष्पीकरण को कम करने, उपजा है। पौधों द्वारा विकसित गहरी और व्यापक जड़ों लंबे शुष्क अवधि सामना करने के लिए अनुमति देते हैं। दोनों कारकों के ऊपर 30% से सिंचाई पानी की आवश्यकता को कम करने के लिए और सूखे साहस सुनिश्चित करने के लिए योगदान करते हैं।
पशुओं के स्वास्थ्य के लिए 5. पंचगव्य
पंचगव्य कई सूक्ष्म जीवों, बैक्टीरिया, कवक, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, अमीनो एसिड, विटामिन, एंजाइमों, कारकों सूक्ष्म पोषक एंटीऑक्सीडेंट और प्रतिरक्षा कारकों को बढ़ाने के तत्वों का पता लगाने को बढ़ावा देने के ज्ञात और अज्ञात विकास के रहने वाले एक अमृत है।
जानवरों और मनुष्य द्वारा मौखिक रूप से लिया है, जब पंचगव्य में रहने वाले सूक्ष्म जीवों प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित और किया जाता सूक्ष्मजीवों के खिलाफ एंटीबॉडी के बहुत उपज। यह वैक्सीन की तरह कार्य करता है। शरीर की यह प्रतिक्रिया पशुओं और मनुष्यों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और इस प्रकार बीमारी को रोकने के लिए मदद करता है और रोग इलाज। यह उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है और शबाब पुनर्स्थापित करता है। पंचगव्य में मौजूद अन्य कारकों के शरीर में जहर के apetite, पाचन और आत्मसात और उन्मूलन में सुधार होगा। कब्ज पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इस प्रकार पशुओं और मनुष्यों के बालों और त्वचा की चमक के साथ चुस्त और स्वस्थ हो जाते हैं। वजन लाभ प्रभावशाली हैं।
मानव स्वास्थ्य के लिए 6. पंचगव्य
शरीर एक से अधिक और एक आधे साल के लिए एलोपैथिक उपचार तहत किया गया था सब कुछ खत्म हो सोरायसिस के साथ एक औरत। वह क्षेत्र में उपयोग के लिए पंचगव्य तैयार करने के लिए हुआ है और उसकी बांह की कलाई के साथ सामग्री हलचल। 15 दिनों के बाद, उसके सामने हाथ में सोरायसिस पूरी तरह से ठीक हो गया। उसे अपने अंतर्ज्ञान के बाद, वह सारे शरीर में और हर किसी के आश्चर्य करने के लिए पंचगव्य लिप्त; सोरायसिस 21 दिनों में गायब हो गया।
खुराक
फ़िल्टर्ड पंचगव्य की 50 मिलीलीटर पानी, टेंडर नारियल पानी या फलों का रस के 200 मिलीलीटर के साथ मिलाया जाता है और सुबह में खाली पेट में मौखिक रूप से लिया। यह रोगों के सभी प्रकार के लिए है।
एड्स / एचआईवी
एड्स / एचआईवी रोगियों को खो भूख और पाचन आ गया और वजन पर डाल दिया। वे बेहतर सोया। उनका बुखार, खांसी, दस्त और त्वचा के घावों एक महीने के इलाज के भीतर गायब हो गया। उनमें से अधिकांश अब खेतों में काम कर रहे हैं और दूसरों को अपने व्यवसायों का पीछा कर रहे हैं। रक्त परीक्षण अभी भी सकारात्मक रहे हैं, वे एड्स के कोई लक्षण नहीं दिखा रहे हैं और एक सामान्य स्वस्थ जीवन जी।
सोरायसिस
सोरायसिस में, यह बहुत प्रभावी है और घावों छह महीने के भीतर गायब हो जाते हैं। एक्जिमा और अन्य एलर्जी त्वचा विकारों में, चिकित्सा और भी तेज है।
मस्तिष्क संबंधी विकार
आक्षेप और पार्किंसनिज़्म तरह मस्तिष्क संबंधी बीमारियों से पीड़ित रोगियों को दी जाती है, यह आक्षेप में हमलों की आवृत्ति को कम करने में मदद की और पार्किंसनिज़्म में हाथ और सिर के झटकों कम कर दिया। वे नियमित रूप से दवाओं को कम करने में सक्षम थे।
मधुमेह
दिन प्रति फ़िल्टर्ड पंचगव्य की 50 मिलीलीटर एक खाली पेट पर सुबह जल्दी में लिया गया था, जब वह रक्त शर्करा को कम करने और विरोधी मधुमेह दवाओं की मात्रा को कम करने के लिए रोगियों को सक्षम होना चाहिए। एक महीने के भीतर गायब हो गया पैर में सामान्य कमजोरी, अपच, कब्ज और जलन की तरह शिकायतों। वे सक्रिय और स्वस्थ हो गया।
फेफड़े का क्षयरोग
यह नियमित रूप से टीबी विरोधी दवाओं के अतिरिक्त दिया जा सकता है। बुखार एक सप्ताह के भीतर गायब हो गया और खांसी दो सप्ताह के भीतर नियंत्रित किया गया था। भूख सुधार हुआ है और मरीजों के शरीर के वजन प्राप्त की। विरोधी टीबी के इलाज की अवधि एक माह से कम हो गया था।
गठिया
यह पूरी तरह से जोड़ों का दर्द, सूजन और कठोरता से राहत मिलती है। गठिया के दो महीने के भीतर ठीक हो जाता है। अब भी स्वस्थ लोगों को और अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान बनने के लिए इसे ले जाओ।

go seva ke labh

गोसेवा से  लाभ  ?


गोसेवा करने से क्या- क्या होता है ?

1. भगवत्प्रेम की प्राप्ति होती है।

2. जन्म-मरण से मुक्ति मिलती है।

3. संतोष मिलता है।

4. धन में वृद्धि होती है।

5. पुण्य की प्राप्ति होती है।

6. संतान की प्राप्ति होती है।

7. दुःख दर्द दूर होते हैं।

8. ताप-संताप दूर होते हैं।

9. हृदयप्रफुलिलत होता है।

10. मन को शान्ति मिलती है।

11. स्वास्थ्य लाभ होता है।

12. तृप्ति का अनुभव होता है।

13. मनुष्य जनम सफल होता है।

14. परिवार को सुख मिलता है।

15. ग्रह-नक्षत्र अनुकूल हो जाते हैं।

16. अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है।

17. गाय सुखी होती है।

18. ईश्वर व संतों की प्रसन्नता प्राप्त होती है।

19. गाय की हत्या रुकती है।

20. राष्ट्र सच्ची प्रगति करता है।


"*जय गौ माता ~जय श्री राम"*

गोसेवा करे...

Friday, 23 December 2016

food and lifestyle diseases

भोजन की थाली उठाइये और लैबटेस्ट करवा लीजिये


पिछले एक महीने के दौरान 7 ऐसे लोगों को खो चुका हूं जिन्हें प्रत्यक्ष या 

अप्रत्यक्ष रुप से जानता था, मृत्यु का कारण हार्ट अटैक या कैंसर।
तीन जनों को  हार्ट अटैक आया,एक को कैंसर डिटेक्ट हुआ,दो के डॉ 

बदले कैंसर के ये 6 अभी जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं।

आप स्वयं अपने आसपास हार्ट,कैंसर,रक्तचाप,बच्चों में अल्प 

मनसिकता,स्वांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के देखते होंगे।
कहाँ गलती हो रही है?
क्या इन सबका कारण खानपान और जीवन शैली नहीं है?
क्या आपको गारन्टी से लगता है कि आप जैसे जी रहे हैं आप स्वस्थ 

रहने वाले हैं?
मेरे अनुसार तो बिलकुल नहीं,मैं स्वयं अपने लिए सुनिश्चित नहीं हूँ।
जीवन शैली और खानपान में निश्चित ही बदलाव लाने होंगे।
जीवन शैली में दोष आपका है पर खानपान में आप अनजाने में गलती कर रहे हैं
वो जहर खाना बन्द करिये जो आप अनजाने में खा रहे हैं।
Endosulphan,Cypermethrin,Chlorpyrifos, Rynaxypyr, 

chlorantraniliprole, 2,4-D,Glyphosate जैसे कुछ नाम गूगल कर 

लीजिये और इनके नुक्सान देखिये।
फिर भोजन की थाली उठाइये और लैबटेस्ट करवा लीजिये।एक दो नहीं 

ये सब साथ में आपके भोजन में मिलेंगे(99% सम्भावना)।
केवल पढ़ने से कुछ न होगा,उठिए और जाँच कराइये,क्योंकि बिना जाँच 

के आपको यहां लिखी बातों पर विश्वास न होगा।
उसके बाद अपना कोई एक शौक बंद कीजिये और स्वस्थ भोजन के लिए 

ज्यादा चुकाकर ही सही जीवन को मौल लीजिये।
अपने परिवार को स्वस्थ रखने की कोशिश कीजिये।
हमारी  आपसे अपील  है कि हमारे  साथ आइये, किसानों को  बल 

दीजिये ताकि उन्हें जैविक खेती का उचित मूल्य मिले और हम जहर 

मुक्त भोजन कर  सके 

जहरमुक्त भोजन हेतु किसानों को प्रोत्साहित करे 

gau grass seva

जो सबेरे शयन से उठकर गौ की परिक्रमा करता है......



पूर्व काल में स्वयंभू ब्रह्माजी ने अग्निहोत्र तथा ब्राह्मणों के लिए सम्पूर्ण तेजो का संग्रह करके कपिला गौ को उत्पन्न किया था. कपिला गौ पवित्र वस्तुओ में सबसे बढ़कर पवित्र, मंगल जनक पदार्थो में सबसे अधिक मंगलकारिणी तथा पुण्यो में परम पुन्य स्वरूप है.

ब्रह्माजी की आज्ञा  से कपिला के सींगो के अग्र  भाग में सदा सम्पूर्ण तीर्थ निवास करते है. 

जो मनुष्य सबेरे उठकर कपिला गौ के सींग और मस्तक से गिरती हिजल धरा को अपने सर पर धारण करता है  वह उस पुन्य के प्रभाव से सहसा पापरहित हो जाता है. 

जैसे आग तिनके को जला डालती है उसी प्रकार वह जल मनुष्य के तीन जन्मो के पापो को भस्म कर डालता है. 

जो कपिला का मूत्र लेकर नेत्र आदि इन्द्रियों में लगता तथा उससे स्नान करता है वह उस स्नान के पुन्य से निष्पाप हो जता है उसके तीस जन्मो के पाप नष्ट हो जाते है. 

जो प्रातः उठकर भक्ति के साथ कपिला गौ को घास की मुट्ठी अर्पण करता है, उसके एक महीने के पापो का नाश हो जाता है. 

जो सबेरे शयन से उठकर कपिला गौ की परिक्रमा करता है उसके द्वारा समूची प्रथ्वी के परिक्रमा हो जाती  है.

VRAJRAJ GAUSLA is being constructed


Starting with a humble beginning in 2010., ill-nourished and helpless cows.

We provide shelter and food to these homeless cattle and also take care of their medical needs at our sprawling establishment  
VRAJRAJ GAUSLA. 



The cow is considered as a sacred & holy animal in Hindu religion.We worship cow on various occasions and we call them Gomata. 


VRAJRAJ GAUSLA is being constructed at 

BYE  PASS  ROAD,      
RITHI, DISTT-KATNI  
MADHYA PRADESH, PIN 483990 

 So please come forward to support and help this noble deed.

OUR ACCOUNT DETAILS  -
ACCOUNT  NAME  -  VRAJRAJ  GAUSEVA  SAMITI
CURRENT ACCOUNT NO.  -  34803334202
IFSC  NO  - SBIN0004642
WEBSITE  - vrajrajgausla.blogspot.com
MOB NOS  - 9407001528,  9009363221

WATSAPP  NO.  - 9407001528,  

पेड़ जो जगा देंगे आपका सोया भाग्य

1. वृक्ष भी भाग्योदय करने में सक्षम होते है… प्रकृति ने हमारे जीवन की भलाई के लिए बहुत सी चीज़ों को बनाया है जिससे हम अपने जीवन को स...