Friday, 28 December 2018

Uses of Gomutra


गौ-मूत्र का कहाँ-कहाँ प्रयोग किया जा सकता है

1.    संसाधित किया हुआ गौ मूत्र अधिक प्रभावकारी प्रतिजैविक, रोगाणु रोधक (antiseptic), ज्वरनाशी (antipyretic), कवकरोधी (antifungal) और प्रतिजीवाणु (antibacterial) बन जाता है|

2.    ये एक जैविक टोनिक के सामान है| यह शरीर-प्रणाली में औषधि के सामान काम करता है और अन्य औषधि की क्षमताओं को भी बढ़ाता है|

3.    ये अन्य औषधियों के साथ, उनके प्रभाव को बढ़ाने के लिए भी ग्रहण किया जा सकता है|

4.    गौ-मूत्र कैंसर के उपचार के लिए भी एक बहुत अच्छी औषधि है | यह शरीर में सेल डिवीज़न इन्हिबिटोरी एक्टिविटी को बढ़ाता है और कैंसर के मरीज़ों के लिए बहुत लाभदायक है

5.       आयुर्वेद ग्रंथों के अनुसार गौ-मूत्र विभिन्न जड़ी-बूटियों से परिपूर्ण है| यह आयुर्वेदिक औषधि गुर्दे, श्वसन और ह्रदय सम्बन्धी रोग, संक्रामक रोग (infections) और संधिशोथ (Arthritis), इत्यादि कई व्याधियों से मुक्ति दिलाता है

 9009363221- Vrajraj Gaushala 

Friday, 21 December 2018

गौ संरक्षण हेतु श्रीमद भगवत कथा ज्ञान यज्ञ तीर्थ नगरी शुक्रताल



*गौ संरक्षण हेतु  श्रीमद भगवत कथा ज्ञान यज्ञ तीर्थ नगरी शुक्रताल में*


*20 मार्च (बुधबार) 2019 से  26 मार्च (मंगलवार) 2019 तक*  -

बुधबार 20 मार्च 2019 - फाल्गुन पूर्णिमा होलिका दहन
 गुरूवार 21 मार्च 2019- होली (धुरेडी)
शुक्रवार 22 मार्च 2019- भाई दूज
सोमवार  25 मार्च 2019 - रंगपंचमी

*तीर्थ नगरी शुक्रताल उत्तर भारत की ऐतिहासिक पौराणिक तीर्थ 

नगरी रही है।*


*यहां पर करीब छह हजार साल पहले महाभारत काल में 

हस्तिनापुर के तत्कालीन 


महाराज पांडव वंशज राजा परीक्षित को श्राप से मुक्ति दिलाकर 

मोक्ष प्रदान करने के 


लिए गंगा किनारे प्राचीन अक्षय वट के नीचे बैठकर 88 हजार 

ऋषि मुनियों के साथ श्री शुकदेव मुनि जी ने श्रीमदभागवत कथा सुनाई थी ।*



*यह वट वृद्ध आज भी भक्ति सागर से ओतप्रोत हरा-भरा अपनी 

विशाल बाहें फैलाए अडिग खड़ा अपनी मनोहारी छटा बिखेर रहा है।*


निवेदक - ब्रजराज गौसेवा समिति, रीठी(कटनी), एम पी

*सम्पर्क - 9009363221 अखिलेश उपाध्याय*



Thursday, 20 December 2018

आखिर मैं इतना चिन्तित और व्याकुल क्यों रहता हूँ ?


 यह पूर्ण और यथार्थ सत्य है कि जिस स्त्री ने या  पुरुष ने किसी आध्यात्मचिन्तक मनुष्य का संग नहीं किया है, तथा आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन नहीं किया है , वह स्त्री और वह पुरुष कितना भी धनवान, बलवान,और बुद्धिमान क्यों न हो, वह मानसिक सन्ताप ,तथा मानसिक अशांति से छुटकारा नहीं पा सकता है ।

जैसा सुनेंगे,और जैसा पढ़ेंगे, तथा जैसे व्यक्ति से वार्तालाप करेंगे,   आपका मन वैसे ही विचारों से प्रभावित हो जाता है । संसार के प्रत्येक मनुष्य को दुखी देखकर अनुमान होता है कि ये रात दिन अप्राप्त वस्तुओं को इकट्ठा करने में  व्यस्त हैं, तथा प्राप्त वस्तुओं की रक्षा करने में व्यग्र है ।

 अध्यात्म चिन्तन के बिना इन दुखियों को कभी नहीं पता चलता है कि " इतने परिश्रम के बाद भी , इतना सबकुछ होते हुए भी , परिवार के सभी सदस्य आस पास होते हुए भी ,आखिर में मैं इतना चिन्तित और व्याकुल क्यों रहता हूँ ?

ऐसा विचार इसीलिए नहीं उठता है,क्यों कि न तो ऐसे विचारक किसी महापुरुष से मिलते हैं, और न ही किसी महापुरुष के विचार ग्रंथों को पढ़ते हैं । अब देखिए  कि सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा जी इस दुख से भरे संसार के विषय में भगवान श्री कृष्ण से क्या कह रहे हैं ।

*"भागवत के 10 वें स्कन्ध के 14 वें अध्याय के 21 वें श्लोक* को ध्यान से पढ़िए और विचार करिए । "

*को वेत्ति भूमन् भगवन् परात्मन् योगेश्वरोतीर्भवतस्त्रिलोक्याम् ।
क्व वा कथं वा कति वा कदेति विस्तारयन् क्रीडसि योगमायाम् ।।*

 ब्रह्मा जी ने स्तुति करते हुए भगवान श्री कृष्ण से कहा कि  हे भगवन् ! हे परमात्मा ! हे योगेश्वर ! तीनों लोकों में मेरे सहित अनेक ज्ञानवान ऋषि महर्षि , इन्द्रादि देवता कोई भी नहीं जानते हैं कि इस मायामय संसार में आप अपनी योगमाया से कहां,  , कब, कितना, कैसे, कब तक ,क्या करना चाहते हैं । क्यों कि आप के लिए तो यह अपनी माया के साथ एक क्रीडा है ।

आपके लिए खेल है । ये सारे मृत्युलोक , स्वर्गलोक ,पातालादि लोक आपके क्रीडास्थल हैं । देवता, दानव, मनुष्य ,स्त्री पुरुष आदि सभी जीव ही आपके साथ खेलनेवाले साथी हैं ।जीवों को पता ही नहीं कि दुख, सुख, स्त्री पुरुष, उत्पत्ति ,विनाश ,रोना ,हंसना ,मरना ,पैदा होना ,बड़ा होना ,घटना , बुद्धिमान होना ,बेईमान होना आदि कबसे चल रहा है ?और कब तक चलेगा ?

कहाँ कहाँ चलेगा ? यह किसी भी दुखी मनुष्य को पता नहीं है कि मेरा दुख कैसे शुरू हो गया है ? कब तक यह दुख रहेगा ? किस किस से कहां, कैसे ,कब तक, दुख मिलेगा । तथा न ही ये किसी को पता है कि जो अभी सुख मिल रहा है ,वह क्यों मिल रहा है?कैसे मिल रहा है?कब तक मिलेगा?किस किस से मिलेगा? कहाँ कहाँ मिलेगा ?

क्यों कि यह सुख दुख ,अपने पराए ,जन्म मृत्यु ,दुष्ट सज्जन ,राजा प्रजा ,स्त्री पुरुष , ईमानदार बेईमान ,आदि का खेल कोई और खेल रहा है ।इन मरे हुए पुतलों को क्या पता है कि जिसने बनाया है वही खेल रहा है ।वही तोड़ेगा । वही सुरक्षित रखेगा ।

वही फेंकेगा ।कुछ पुतलों को सुरक्षित रखेगा ,कुछ पुतलों को बाहर ही पड़े रहने देगा , कुछ को सजाएगा ,कुछ पुतलों को नंगा ही खड़ा रखेगा । किसी को किसी के पीछे भगाएगा , पकड़ाएगा , फिर छुड़ाएगा । किसी को किसी से मरवाएगा , तो किसी से किसी को बचाएगा ।

सोचिए कि यदि इस खेल को कोई खेल रहा है तो आपके रोने चिल्लाने से वह हंसेगा कि दुखी होगा ? हंसेगा ही । क्यों कि खिलाड़ी जिस पुतले को रुलाना चाहता है ,वह रोएगा ,तभी तो वह खुश होगा , फिर कोई उसे चुप कराएगा ,तो वह खिलाड़ी दोनों को देखकर ऐसे हंसेगा जैसे बच्चा ताली बजाते हुए बंदर के खिलौने को देखकर खुद ताली बजा बजा कर हंसने लगता है ।

भगवान भी आप सभी को दुखी सुखी देखकर खूब हंसते हंसते खुश होते रहते हैं । कोई दो पुतले लड़ रहे हैं , फिर कोई पुलिस बनकर एक पुतला पकड़कर ले जाता है ।

निर्णय देने के लिए एक पुतला कुर्सी पर पहले से ही बैठा हुआ है ।उसने जैसा कहा ,वैसा होने लगा । जेल में गया हुआ पुतला ,अपने जैसे हजारों पुतलों के साथ रहने लगा । यहां पिटा हुआ पुतला उसकी सजा से खुश हो गया । स्वयं तो परेशान हुआ है ,फिर भी खुश है ।

बस ,सारा का सारा खेल ऐसा ही खेला जा रहा है ।ऐसा ही खेला जाएगा । लेकिन यह खेल जिस किसी पुतले को पता चल जाएगा ,वह चुपचाप सारे काम बंद करके उस खिलाड़ी के साथ बैठकर हंसेगा ।

वही तो महात्मा है ।इसलिए वह आपके जैसे काम बंद करके नंगा भूखा ,रहकर भी हंसता खेलता है ।आपको यदि खिलाड़ी का खेल समझना है तो उस महात्मा के पास जाओ और उसके खेल को समझ लो और मस्त हो जाओ । राधे राधे ।

*-आचार्य ब्रजपाल शुक्ल ,वृन्दावनधाम*

Wednesday, 19 December 2018

हनुमान जी दलित थे तो उनकी पूजा और कोई नहीं कर सकता ?

आप लोग अभी कुछ दिनों से समाचार पत्रों में पढ़ रहे होंगे ,और टी. बी. आदि में देख सुन रहे होंगे कि उ.प्र.के मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि " हनुमान जी दलित थे " ।

 वे यहीं नहीं रुके , उन्हें इतना कहने से संतोष नहीं हुआ तो फिर से बोले कि " वेदों के सभी ऋषि हरिजन थे "  । कुछ लोगों को बहुत ही बुरा लगा । 

तथा आश्चर्य भी हुआ  । यहां तक चर्चा होने लगी कि " एक महात्मा होकर , उस पर भी मुख्यमंत्री होकर योगी जी को ऐसा नहीं कहना चाहिए था । 

वैसे तो प्रायः सभी दलित समाज हरिजन समाज भा.ज.पा. के लोगों से परहेज करते हैं , लेकिन मुख्यमंत्री की बात को प्रामाणिक मानकर बहाना लेकर सभी लोग इकट्ठे होकर आगरा लखन ऊ आदि में कुछ स्थानों में हनुमान मंदिर में पहुंच गए और ब्राह्मणों को हटाकर स्वयं पूजा अर्चना करने के लिए जबरदस्ती तैयार हो गए । 

अलग से हनुमान जी के मंदिर नहीं बना रहे हैं । किंतु बने बनाए मंदिरों में अपना हक दिखा रहे हैं ।

 हनुमान जी दलित थे तो क्या अब उनकी पूजा और कोई नहीं कर सकते हैं ? 

हनुमान चालीसा तो ब्राह्मण का बनाया हुआ है । अब चालीसा भी अलग से कोई बनाओ । 

कल को मुसलमान भी कहेंगे कि अब्दुल कलाम तो हमारे थे , अब उनकी बनाईं हुईं सभी मिसाइलें हमारीं हैं ।उन्हें और कोई नहीं चला सकता है ।मुसलमान ही चलाएंगे । 

इसीलिए भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि अज्ञानी मनुष्य को उसकी बुद्धि के स्तर को देखकर ही ज्ञान और कर्म का उपदेश करना चाहिए । 

कर्म करने के योग्य मनुष्य को कर्म का ही उपदेश करना चाहिए । 

ज्ञान का उपदेश दिया जाएगा तो कर्म का त्याग भी कर देगा और ज्ञान भी नहीं हो सकेगा । 

अर्थात बुद्धिमान व्यक्ति को कुछ भी कहने के पहले ,कुछ भी करने के पहले परिणाम का विचार कर लेना चाहिए । 

राजनेता बनने के पहले तो योगी आदित्यनाथ जी एक अच्छे दिव्य संप्रदाय से दीक्षित हैं 

इनके गुरुदेव ब्रह्मलीन अवैद्यनाथ जी भी सांसद रहे हैं । आपका गोरखपुर में मंदिर भी सुसमृद्ध है । 

योगी आदित्यनाथ जी को विरासत में राजनीति तो प्राप्त हुई है लेकिन एक अच्छे विरक्त ज्ञान ,कर्म भक्ति सम्पन्न शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त नहीं हो पाया है ।

अनेक महात्माओं ने अनेक प्रकार के परोपकारी सामाजिक पुण्यशाली कार्य किए हैं । 

ये भी कर रहे हैं , लेकिन इनका कार्य एक महात्मा के समान सार्वभौम प्रेरणादायक कार्य नहीं है । 

"प्रभुता पाइ काह मद नाहीं " । पद और धन पाकर किसको अहंकार नहीं हो जाता है ? अर्थात सबको हो जाता है । 

न तो योगी आदित्यनाथ जी सम्प्रदाय का ज्ञान कर पाए ,और न ही एक अच्छे सर्वप्रिय महात्मा ही बन पाए ,तथा न ही एक अच्छे सम्माननीय राजनेता ही बन पाए 

क्यों कि वोट लोभ तथा पद के अहंकार ने इनके सभी दुर्गुणों को प्रगट करके सद्गुणों को भस्मीभूत कर दिया है ।

हिन्दुओं के पक्षपाती भाषणों के कारण योगी आदित्यनाथ जी लोकप्रिय हुए थे , लेकिन आज उनके प्रति महात्माओं की तथा उच्चवर्ण के समाज की धिक्कार भावना जग रही है । 

आज उन्हें पद के कारण भले अहसास न हो रहा हो , किन्तु आयु और पद की समाप्तिकाल में योगी जी को अपने कथनों और कर्मों पर जितना पश्चात्ताप होगा , इतना पश्चात्ताप  शायद फांसी के सजायाप्ता मुजरिम को भी नहीं होगा ।

 क्यों कि हर मनुष्य को वृद्धावस्था के असमर्थकाल में ही अपने कर्मों का फल प्राप्त होता है ।

 वे एक न एकदिन अवश्य सोचेंगे कि एकदिव्य योगियों के परंपरा में दीक्षा लेने के बाद भी मैं एक अच्छा योगी न बन पाया । 

तथा न ही एक दयालु ,निर्मल , निर्लोभी , सर्वसमाजपूज्य महात्मा बन पाया । और न ही पद प्रतिष्ठा प्राप्त करके भी हिन्दुओं के लिए कुछ नहीं  कर पाया । 

और न ही एक सामान्य पारिवारिक सुख प्राप्त कर पाया । न तो भगवान का प्रिय बन पाया ,तथा न ही किसी भी समाज का प्रिय बन पाया । 

इस माया की चकाचौंध ने मेरा पूरा पुरुष जीवन , मनुष्य जीवन ही नष्ट कर दिया । पता नहीं अब मरने के बाद पुनः ऐसा अवसर मिलेगा कि नहीं । 

 धन ,पद ,बल ,वैभव , योगियों का संप्रदाय , महात्मा वेष , क्षत्रिय जाति में जन्म , कुशल वक्तृत्वशैली , निर्भीकता आदि दिव्य गुण मुझे परमात्मा ने दिए थे , लेकिन मैं कुछ नहीं कर पाया । राजनेताओं की कुसंगति में फंसकर मैंने आत्मविनाश कर लिया ।

 " तुलसीदास जी ने कहा है कि " संग ते यती कुमंत्र ते राजा " कुसंग से महात्मा यति नष्ट हो जाता है ,और कुमंत्रियों से राजा नष्ट हो जाता है । यही दशा आज योगी आदित्यनाथ जी की हो गई है । 

" न खुदा ही मिला न विसाले शनम " । राधे राधे । 

-आचार्य ब्रजपाल शुक्ल , वृन्दावन धाम ।

Tuesday, 18 December 2018

घरेलु उपायो से करे गठिया (arthritis) को अलविदा

घरेलु उपायो से करे गठिया (arthritis) को अलविदा---
गठिया को आयुर्वेद में नामदिया भी कहा जाता है। आधुनिक चिकित्सा के अनुसार खून में यूरिक एसिड की अधिक मात्रा होने से गठिया रोग होता है। खाने में प्रोटीन बढ़ने पर भी ये समस्या बढती है। भोजन में शामिल खाद्य पदार्थों के कारण जब शरीर में यूरिक एसिड अधिक मात्रा में बनता है तब गुर्दे उन्हें खत्म नहीं कर पाते और शरीर के अलग- अलग जोड़ों में में यूरेट क्रिस्टल जमा हो जाता है। और इसी वजह से जोड़ों में सूजन आने लगती है तथा उस सूजन में दर्द होता है।
पुरुषो में यूरिक एसिड बढ़ने पर पत्थरीकी समस्या भी बढ़ती है।
अधिकतर महिलाओं मे Arthritis की समस्या ज्यादा है।
सबसे जरूरी और सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मौसम के मुताबिक 3 से 6 लिटर पानी पीने की आदत डाले। ज्यादा पेशाब होगा और अधिक से अधिक हानिकारक पदार्थ और यूरिक एसीड बाहर निकलते रहेंगे।
आलू का रस
आलू का रस 100 मिलि भोजन के पूर्व लेना हितकर है।
लहसुन, गिलोय, देवदारू,सौंठ, अरंड की जड
लहसुन, गिलोय, देवदारू, सौंठ, अरंड की जड ये पांचों पदार्थ 50-50 ग्राम लें।
इनको कूट-छान कर शीशी में भर लें।
2 चम्मच की मात्रा में एक गिलास पानी में डालकर ऊबालें ,जब आधा रह जाए तो उतारकर छान लें और ठंडा होने पर पी लें। ऐसा सुबह शाम करने से गठिया में अवश्य लाभ होगा।
लहसुन सैंधा नमक,जीरा,हींग,पीपल,काली मिर्च व सौंठ
लहसुन की कलियां 50 ग्राम लें।
सैंधा नमक,जीरा,हींग,पीपल,काली मिर्च व सौंठ 2-2 ग्राम लेकर लहसुन की कलियों के साथ भली प्रकार पीसकर मिलालें। यह मिश्रण अरंड के तेल में भून कर शीशी में भर लें। आधा या एक चम्मच दवा पानी के साथ दिन में दो बार लेने से गठिया में आशातीत लाभ होता है।
हार सिंगार
हार सिंगार के ताजे पती 4-5 नग लें। पानी के साथ पीसले या पानी के साथ मिक्सर में चला लें। यह सुबह-शाम लें 3-4 सप्ताह में गठिया और वात रोग नियंत्रित होंगे। जरूर आजमाएं।
गिलोय – देसी घी
गिलोय का रस पीने से गठिया रोग में सूजन और दर्द दूर होता है। देसी घी के साथ गिलोय का रस लेने से गठिया से मुक्ति मिलती है।
एरंड तेल
एरंड तेल के साथ गिलोय का रस लेने से गठिया खत्म होती है। अरण्डी के तैल से मालिश करने से भी गठिया का दर्द और सूजन कम होती है।
पंचामृत लोह गुगल, रसोनादि गुगल, रास्नाशल्ल
पंचामृत लोह गुगल, रसोनादि गुगल, रास्नाशल्ल की वटी तीनों एक-एक गोली सुबह और रात को सोते वक्त दूध के साथ 2-3 माह तक लेने से गठिया में बहुत फ़ायदा होता है।
अश्वगंधारिष्ट ,महारास्नादि काढा और दशमूलारिष्टा
इस के साथ अश्वगंधारिष्ट ,महारास्नादि काढा और दशमूलारिष्टा 2-2 चम्मच मिलाकर दोनों वक्त भोजन के बाद लेना हितकर है।
हरी साग सब्जी
गठिया रोग में हरी साग सब्जी का प्रचुरता से इस्तेमाल करना बेहद फ़ायदेमंद रहता है। पत्तेदार सब्जियो का रस भी अति उपयोगी रहता है।
जेतुन तैल
भाप से स्नान करने और जेतुन के तैल से मालिश करने से गठिया में अपेक्षित लाभ होता है।
गुन गुने जल का एनिमा
गठिया रोगी को कब्ज होने पर लक्षण उग्र हो जाते हैं। इसके लिये गुन गुने जल का एनिमा देकर पेट साफ़ रखना आवश्यक है।
सौंठ
सूखे अदरक (सौंठ) का पावडर 10 से 30 ग्राम की मात्रा में नित्य सेवन करना गठिया में परम हितकारी है।
परिश्रम
गठिया रोगी के लिये अधिक परिश्रम करना या अधिक बैठे रहना दोनों ही नुकसान कारक होते हैं। अधिक परिश्रम से अस्थिबंधनो को क्षति होती है जबकि अधिक गतिहीनता से जोडों में अकडन पैदा होती है।
गरम कपडे का सेक
एक लिटर पानी तपेली या भगोनी में आंच पर रखें। इस पर तार वाली जाली रख दें। एक कपडे की चार तह करें और पानी मे गीला करके निचोड लें । ऐसे दो कपडे रखने चाहिये। अब एक कपडे को तपेली से निकलती हुई भाप पर रखें। गरम हो जाने पर यह कपडा दर्द करने वाले जोड पर 3-4 मिनिट रखना चाहिये। इस दौरान तपेली पर रखा दूसरा कपडा गरम हो चुका होगा। एक को हटाकर दूसरा लगाते रहें। यह विधान रोजाना 15-20 मिनिट करते रहने से जोडों का दर्द आहिस्ता आहिस्ता समाप्त हो जाता है। बहुत ही साधारण परंतु कारगर उपाय है

*गिलोय अद्भुत औषधि*

*गिलोय अद्भुत औषधि*

चलो भारतीय औषधियों की ओर....
हमारे ऋषि मुनियों ने अनेक औषधियों पर अपने जीवन का बहुत समय जड़ीबूटियों की खोज और उसके अनुसन्धान पर लगाया है ।उनमें से एक बहुत अच्छी और मानव रोगप्रतिरोधक तंत्र को मजबूत करने वाली औषधि है| उसके गुणों का प्रचार करना और अनेक दु:खो को रोगों को दूर करने वाली *गिलोय* को आम जनमानस तक पहुंचाना है|


जब स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ता तो लोग आयुर्वेद की शरण में पंहुचते । इलाज के रूप में *गिलोय* का नाम खासा चर्चा में आया। *गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है,* इसका का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसके खास गुणों के कारण इसे अमृत के समान समझा जाता है और इसी कारण इसे अमृता भी कहा जाता है। प्राचीन काल से ही इन पत्तियों का उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाइयों में एक खास तत्व के रुप में किया जाता है।

*गिलोय* की पत्तियों और तनों से सत्व निकालकर इस्तेमाल में लाया जाता है। गिलोय को आयुर्वेद में गर्म तासीर का माना जाता है। यह तैलीय होने के साथ साथ स्वाद में कडवा और हल्की झनझनाहट लाने वाला होता है।


*गिलोय* के गुणों की संख्या काफी बड़ी है। *इसमें सूजन कम करने,शुगर को नियंत्रित करने,गठिया रोग* से लड़ने के अलावा शरीर शोधन के भी गुण होते हैं। गिलोय के इस्तेमाल से *सांस संबंधी रोग जैसे दमा और खांसी में फायदा होता*है। इसे *नीम और आंवला* के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से *त्वचा संबंधी रोग जैसे एग्जिमा और सोराइसिस दूर किए जा सकते हैं*। इसे खून की कमी,पीलिया और कुष्ठ रोगों*के इलाज में भी कारगर माना जाता है।

सूजन कम करने के गुण के कारण, यह *गठिया और आर्थेराइटिस* से बचाव में अत्यधिक लाभकारी है। गिलोय के पाउडर को सौंठ की समान मात्रा और गुगुल के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेने से इन बीमारियों में काफी लाभ मिलता है। इसी प्रकार अगर ताजी पत्तियां या तना उपलब्ध हों तो इनका ज्यूस पीने से भी आराम होता है।


आयुर्वेद के हिसाब से *गिलोय* रसायन यानी ताजगी लाने वाले तत्व के रुप में कार्य करता है। इससे इम्यूनिटी सिस्टम में सुधार आता है और शरीर में अतिआवश्यक सफेद सेल्स की कार्य करने की क्षमता बढ़ती है। यह शरीर के भीतर सफाई करके लीवर और किडनी के कार्य को सुचारु बनाता है। यह शरीर को बैक्टिरिया जनित रोगों से सुरक्षित रखता है। इसका उपयोग सेक्स संबंधी रोगों के इलाज में भी किया जाता है।

लंबे समय से चलने वाले बुखार के इलाज में गिलोय काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है जिससे यह डेंगू तथा स्वाइन फ्लू के निदान में बहुत कारगर है। इसके दैनिक इस्तेमाल से मलेरिया से बचा जा सकता है। गिलोय के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए।

*शरीर में पाचनतंत्र को सुधारने में गिलोय काफी मददगार होता है*। गिलोय के चूर्ण को आंवला चूर्ण या मुरब्बे के साथ खाने से गैस में फायदा होता है। गिलोय के ज्यूस को छाछ के साथ मिलाकर पीने से अपाचन की समस्या दूर होती है साथ ही साथ बवासीर से भी छुटकारा मिलता है।
गिलोय में शरीर में शुगर और के स्तर को कम करने का खास गुण होता है। इसके इस गुण के कारण यह डायबीटिज टाइप2के उपचार में बहुत कारगर है।

गिलोय को अमृता भी कहा जाता है अमृता एडाप्टोजेनिक हर्ब है अत:मानसिक दवाब और चिंता को दूर करने के लिए उपयोग अत्यधिक लाभकारी है। गिलोय चूर्ण को अश्वगंधा और शतावरी के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें याददाश्त बढ़ाने का गुण होता है। यह शरीर और दिमाग पर उम्र बढ़ने के प्रभाव की गति को कम करता है।

*विशेष सावधानी*:-
अपने अनगिनत गुणों के साथ गिलोय सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है परंतु कुछ लोगों में इससे विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। इससे कुछ लोगों की पाचन क्रिया खराब हो सकती है।


नोट :- गर्भवती महिलाओं को बिना चिकित्सकीय* सलाह के इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।


आप अपने आसपास समाज मे जरूर गिलोय के गुणों के बारे में बतायें ताकि समाज मे लोग जागरूक हों और अपने परिवारों का रोगों से स्वयं समाधान करें |


गिलोय युक्त गौ मूत्र अर्क या गोली (घन वटी) की आवश्यकता हो तो 
व्हाट्स एप करे 9009363221

Sunday, 16 December 2018

साबुन से मानव को ख़तरा


        हम साबुन से नहाकर सोचते है की हमारे शरीर की सफ़ाई हो गयी , परंतु सफ़ाई ऐसे होती है जैसे जब चोर घर का पुरा माल ले जाता है फिर हम बोलते है की चोर घर का पुरा माल साफ़ कर गया । 

भाइयों वेद के अनुसार अपनी स्किन ख़ुद सफ़ाई करती है ,वेद में नहाने का ज़रूर लिखा है परंतु उसका उद्देश अपनी शरीर की माँसपेशियों को एक्टिव करने का  है , 

अपने शरीर का तापमान ३७ डिग्री रहता है और सामान्य मौसम में पानी का तापमान २५ डिग्री रहता है , 

जब शरीर से कम तापमान शरीर पर डालते है तो उसको ३७ डिग्री तक लाने के लिए सारी मांसपेशिया एक्टिव हो जाती है ,

 बस इतना ही काम बताया है नहाने से वेद में । 

अब इन भांड लोगों  ( फ़िल्मी दुनिया ) ने TV पर इतना प्रचार कर दिया कि बिना साबुन के नहाना मतलब ग़रीब , महागरीब । 

मै पिछले एक साल से केवल सादे पानी से नहा रहा हु , और शरीर एकदम स्वस्थ है ।  

साबुन के दुस्परिणाम

 पहला स्किन पर कुछ चिकनाई रहती है जिस से स्किन फटे नहीं और मुलायम रहे और स्किन स्वस्थ रहे । 

साबुन ने चिकनाई ख़त्म कर दी , नहाने के बाद शरीर पर तेल लगाओ या स्किन रोग होना निश्चित है । 

अब आगे सुनो जब साबुन के उपयोग के बाद पानी नाली में बहा जाता है । फिर ये गंदा पानी ज़मीन में जाएगा या किसी नदी नाले में । 

इस तरह ये पानी दोनो जगह से लोटकर प्रदूषित होकर , कैन्सर युक्त होकर हमारे पास वापिस आता है ,या तो ट्यूबवेल , हेंडपम्प , या नगर पालिका से सुबह सप्लाई होकर । 

नगर पालिका से जो पानी घरों में आता है वह किसी नदी पर डैम बनाकर या बहती नदी के पानी को फ़िल्टर प्लांट पर साफ़ करके सप्लाई की जाती है

 जब फ़िल्टर प्लांट पर पानी साफ़ होता है तो , उसको दो तरह से साफ़ किया जाता है की वो दिखने में साफ़ हो दूसरा ज़हरीला ना हो 

 रेत में छानकर साफ़ कर दिया और क्लोरीन डालकर किटाणुरहित कर दिया , 

क्लोरीन अपने में ही ज़हर है मतलब ज़हर को बड़े ज़हर से मारा गया । 

फिर वो पानी आपके पास ही आएगा , जब इस तरह का पानी लम्बे समय तक पियोगे तो कैन्सर होना निस्चित है ।

अब इस साबुन का पानी नदी नाले से किसान भी अपनी फ़सलो को देते है , 

वो फ़सल भी ज़हरीली होती है और मिट्टी भी कठोर हो जाती है , मिट्टी इतनी कठोर हो जाती है की इसकी जुताई केवल ट्रैक्टर से हो सकती है बैल से  नहीं । 

और जब मिट्टी कठोर हो गयी तो बारिश का पानी नीचे ज़मीन में नहीं जाएगा , केवल बाढ़ लाएगा 

मतलब प्रलय ही प्रलय

 इसी तरह 
कपड़े धोने का साबुन, 
बर्तन साफ़ करने वाला साबुन , 
टॉयलेट साफ़ करने वाला हार्पिक का उपयोग करना कैन्सर को न्योता देना है , 

इन सभी का विकल्प मिट्टी है , मिट्टी को साबुन की जगह उपयोग कीजिए मानव जीवन को बचाइए 
(वैद्य जीतुभाई, डीसा, गुजरात)
पंचगव्य से निर्मित केमिकल रहित साबुन का प्रयोग करे

पंचगव्य साबुन प्राप्त करे -9009363221
ब्रजराज गौशाला रीठी, कटनी, एम पी

Friday, 14 December 2018

कैल्सियम वटी वात पित और कफ तीनों तरह के बीमारी में लाभदायक

चुना और हल्दी इसके साथ ही (छाछ) के संयोग से जब गोली बनती है फिर बात ही क्या कहना है | इसे कहते हैं कैल्सियम वटी वात पित और कफ तीनों तरह के बीमारी में लाभदायक | जिंन्हे बनी बनाई चाहिए तुरंत मैसेज करें: वहैट्सऐप 8019517451
बच्चों से लेकर बूढ़े सभी सेवन कर सकते हैं | (पथरी बनने की शिकायत वाले न लें)
कैल्शियम हड्डियों और दांतों की सरंचना में मुख्य भूमिका निभाता है। कैल्शियम की कमी से हड्डियों में अनेक रोग हो जाते हैं, मसल्स में अकड़ाव आने लगता है। जोड़ों में दर्द रहने लगता है। कैल्शियम की कमी के कारण शरीर में दर्द लगातार बना रहता है। ऐसे अनेक रोग कैल्शियम के कारण होने लगते हैं। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा पायी जाती है। आज हम आपको एक ऐसा नुस्खा बताने जा रहे हैं जिसके प्रयोग से आपकी कैल्शियम की कमी दूर होगी और आपकी हड्डिया फौलाद बन जाएँगी।
शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में एक कैल्शियम भी है जो शरीर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हड्डियों को और दांतो की मजबूती के लिए कैल्शियम जरूरी पोषक तत्व है। हर किसी को एक दिनभर में कैल्शियम की एक निश्चित मात्रा की जरूरत होती है।
एक स्वस्थ्य मनुष्य को दिन भर में 1000 से 1200 मिली ग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है। वहीं गर्भवती महिलाओं को पूरे दिन में 1200 से 1300 मिली ग्राम कैल्शियम की आवश्कता होती है। आजकल न सिर्फ बूढ़ों में बल्कि जवान और बच्चों में भी कैल्शियम की काफी कमी देखी जा रही है। हम बता रहे हैं कुछ लक्षण जिनसे आप जान पायेंगे कि आपके शरीर में कैल्शियम की कमी है।
कुछ लक्षण जिनसे आप जान पायेंगे कि आपके शरीर में कैल्शियम की कमी है
हड्डियों में कमजोरी : कैल्शियम हड्डियों के बनने में मदद करता है और इसकी कमी होने पर इसका पहला लक्षण हड्डियों पर दिखाई देता है। कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और फ्रैक्चर होने की संभावना बढ़ जाती है। कैल्शियम कमी से उम्र के साथ आस्टियोपेरोसिस का होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
मांसपेशियों में खिंचाव : मसल्स के निर्माण में कैल्शियम की अहम भूमिका होती है। शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर इसका सीधा असर मांसपेशियों पर पड़ता है और उनमें खिंचाव होने लगता है। इसकी कमी से खासतौर पर जांघों और पिंडलियों में असहनीय दर्द होता है।
नाखूनों का कमजोर होना : आपके नाखून भी एक तरह की हड्डियां ही होती हैं इन्हें भी बढ़ने और मजबूत होने के लिए कैल्शियम की जरूरत होती है। कैल्शियम की कमी से नाखून कमजोर होने लगते हैं और आसानी से टूट जाते हैं। शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर नाखूनों पर सफेद निशान दिखने लगते हैं।
दांतों का कमजोर होना : शरीर में मौजूद 99 प्रतिशत कैल्शियम हड्डियों और कैल्शियम की कमी से दांतों में दर्द और झनझनाहट होने लगती है और दांत कमजोर होकर टूटने लगते हैं। छोटे बच्चों में कैल्शियम की कमी से दांत देर से निकलते हैं।
थकान : कैल्शियम की कमी से हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द रहने की वजह से शरीर में थकान होने लगती है। इस वजह से नींद न आना, डर लगना और तनाव जैसी समस्याएं होने लगती हैं। महिलाओं में बच्चे के जन्म के बाद अक्सर कैल्शियम की कमी हो जाती है और वे थकान महसूस करने लगती हैं।
मासिक धर्म में अनियमितता : महिलाओं में कैल्शियम की कमी की वजह से मासिक धर्म देर से और अनियमित तौर पर होता है। मासिक धर्म से पहले कैल्शियम की कमी के कारण ज्यादा दर्द होता है और खून भी ज्यादा आता है। कैल्शियम महिलाओं के गर्भाशय और ओवेरियन हार्मोन्स के विकास में मदद करता है।
जल्दी-जल्दी बीमार पड़ना : कैल्शियम रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा ये श्वसन तंत्र ठीक रखता है और आंतों के संक्रमण को रोकता है। कैल्शियम की होने पर व्यक्ति जल्दी जल्दी बीमार पड़ने लगता है।
बालों का झड़ना : बालों के विकास में कैल्शियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसकी कमी से बाल झड़ने लगते हैं और रुखे हो जाते हैं। अगर आपको ऐसी समस्या है तो ये शरीर में कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकती है।
कोई भी आवश्यक विटामिन या मिनरल तभी अच्छा काम करेगा जब आपके शरीर में कैल्शियम की उचित मात्रा होगी |
आवश्यक सामग्री :
हल्दीगाँठ 1 किलोग्राम
बिनाबुझा चूना 2 किलो
नोट : बिना बुझा चुना वो होता है जिससे सफेदी की जाती है।( रासायनिक छोड़ कर)
बनाने की कई विधियाँ हैं, जिसमें से एक वर्णित है |
सबसे पहले किसी मिट्टी के बर्तन में चूना डाल दें। अब इसमें इतना पानी डाले की चूना पूरा डूब जाये। पानी डालते ही इस चूने में उबाल सी उठेगी। जब चूना कुछ शांत हो जाए तो इसमें हल्दी डाल दें और किसी लकड़ी की सहायता से ठीक से मिक्स कर दे। इस हल्दी को लगभग दो माह तक इसी चूने में पड़ी रहने दे। जब पानी सूखने लगे तो इतना पानी अवश्य मिला दिया करे की यह सूखने न पाए। दो माह बाद हल्दी को निकाल कर ठीक से धो लें और सुखाकर पीस ले और किसी कांच के बर्तन में रख लें।
इसके लाभ :
कुपोषण, बीमारी या खानपान की अनियमितता के कारण शरीर में आई कैल्शियम की कमी बहुत जल्दी दूर हो जाती है और शरीर में बना रहने वाला दर्द ठीक हो जाता है।
ये दवा बढ़ते बच्चों के लिए एक अच्छा bone टॉनिक का काम करती है और लम्बाई बढ़ाने में बहुत लाभदायक है टूटी हड्डी न जुड़ रही हो या घुटनों और कमर में दर्द तो अन्य दवाओं के साथ इस हल्दी का भी प्रयोग बहुत अच्छे परिणाम देगा।
सावधानी : जिन्हें पथरी की समस्या है
अमर बलिदानी स्वर्गीय भाई राजीव दीक्षित जी के विचारों (स्वस्थ व समृद्ध भारत) को फैलाने हेतु अपना अमूल्य समय और श्रम दान करें

Thursday, 13 December 2018

अपने दुर्भाग्य को मनुष्य अकेले ही भोगता है


जब भी मनुष्य के ऊपर कुछ आपत्ति आती है , या अकस्मात् कोई दुख आ जाता है तो घबराहट और चिंता के कारण विवेकहीन हो जाता है। अपने सारे दुखों का कारण अपने आस पास के लोगों को ही मानता है ।

*भागवत के 10 वें स्कन्ध के 82 वें अध्याय* में वसुदेव जी तथा बहिन कुन्ती का इस दुख और आपत्ति के विषय में अद्भुत संवाद है ।

श्री शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को बताया कि एकबार ऐसा सूर्यग्रहण पड़ रहा था कि जैसे प्रलयकाल में सूर्यग्रहण पड़ता है । भगवान श्री कृष्ण ने सभी द्वारकावासियों से स्यमन्तपञ्चक क्षेत्र में चलने के लिए कहा । सभी तैयार हो कर चल पड़े ।

यह वह क्षेत्र है ,जहां कि परशुराम जी ने  हैहयवंश के अनेक क्षत्रिय राजाओं को मारकर उनके रक्त से पूरा एक तालाब भर दिया था । जैसे द्वारका से सभी वहां पहुंच रहे थे , वैसे ही व्रज वृन्दावन से सभी व्रजवासी नन्द यशोदा के साथ स्यमन्तपञ्चक क्षेत्र में पहुंच चुके थे ।

हस्तिनापुर से कुन्ती आदि सभी लोग भी वहां आ गए । सभी विछुड़े हुए आत्मीयजनों का अद्भुत समागम हो गया । एक दूसरे के गले लग कर एक दूसरे के दुख सुख की बात करने लगे ।

*भागवत के10 वें स्कन्ध के इसी 82 वें अध्याय के 18 वें और 19 वें श्लोक* में कुन्ती ने अपने दुख को सुनाते हुए वसुदेव जी से कहा कि 

*आर्य भ्रातरहं मन्ये आत्मानमकृताशिषम् ।
यद्वा आपत्सु मद्वार्तां नानुस्मरथ सत्तमाः ।। 18 ।।*

  कुन्ती ने कहा कि हे भ्राता वसुदेव ! मैं बहुत अभागिनी हूं ।मैंने पूर्वजन्म में एक भी अच्छे पुण्यकार्य नहीं किए हैं कि इस जन्म में मुझे कुछ सुख शान्ति मिलती । अकाल में ही मेरे पति चले गए । मेरे पांचों पुत्र परम धर्मात्मा हैं । मेरी पुत्रबधू पतिव्रता है ।

इस जन्म में कभी भी कहीं भी हम में से किसी ने भी कोई पाप भी नहीं किया है ।किसी को सताया भी नहीं है । फिर भी पितृछायाहीन सपत्नीक पुत्रों की दशा एक अनाथ बालकों की तरह हो गई है । मैं अभागिनी हूं ,इसीलिए तो आप लोग भी हम लोगों को स्मरण भी नहीं करते हैं । कभी हमारे विषय में आप लोगों ने सोचा भी नहीं है कि कुन्ती कैसे जी रही है ।महात्मा लोग ठीक ही कहते हैं कि

*सुहृदो ज्ञातयः पुत्राः भ्रातरः पितरावपि ।
 नानुस्मरन्ति स्वजनं यस्य दैवमदक्षिणम् " ।। 19 ।।*

 जिसका दुर्भाग्य जगता है , उस मनुष्य को आपत्तिकाल में मित्र छोड़ देते हैं ।पुत्र भी त्याग देते हैं । अपनी जाति के परिवार के लोग भी अनेक दोष देते हुए त्याग देते हैं । यहां तक कि माता पिता भाई भी त्याग देते हैं ।

*अपने दुर्भाग्य को मनुष्य अकेले ही भोगता है ।* इसलिए आप लोगों ने भी अपनी बहिन को आपत्तिकाल में त्याग दिया है । अब देखिए कि कुन्ती के हताशाभरे वाक्यों का वसुदेव जी ने कितना गजब उत्तर दिया है ।

*इसी 19 वें श्लोक के आगे 20 वें और 21 वें श्लोक में*

*अम्ब मास्मानसूयेथा दैवक्रीडनकान् नरान् ।
ईशस्य हि वशे लोकः कुरुते कार्यतेsथवा ।।20 ।।*

 वसुदेव जी ने कुन्ती को मां का सम्बोधन करते हुए कहा कि " हे अम्ब , हे माँ ! इस तरह से दुखी होकर हमारे प्रति दोष भावना मत करो । हम तुम्हारी आपत्ति में तुम्हारे पास नहीं आए , क्यों कि हम सुखी हो गए । ऐसा सोचकर तथा हमें बताकर दुखी मत हो । क्यों कि यहां संसार में सभी जीव अकेले हैं ।यहां कोई भी किसी का नहीं है ।

हम सभी जीव जगतनिर्माता ईश्वर के अधीन हैं ।यहां कोई स्वतन्त्र नहीं है ।सभी देव दानव आदि के तीनों लोकों के जीव उस ईश्वर के खिलौना हैं । यहां कोई जो भी कर्म करता है या करवाता है , वह सब ईश्वर के अधीन होकर ही करता और करवाता है ।

इसलिए इस संसार का सुख और दुख जो भी प्राप्त होता है उसे जीव को भोगना पड़ता है ।

*कंसप्रतापिता सर्वे वयं याता दिशो दश ।
एतर्ह्येव पुनः स्थानं दैवेनासादितः स्वसः ।। 21 ।।*

 देखो , मेरी बहिन ! जब मेरा देवकी के साथ विवाह हुआ था , तभी से कंस ने हमें प्रताड़ित करना प्रारम्भ कर दिया था । 11 वर्ष कारागार में बंद रखा था । मेरे नवजात शिशुओं की हमारे सामने ही हत्या की गई ।

उस कंस के भय के कारण हम सभी दशों दिशाओं में आत्म रक्षा के लिए जहां तहां छिपकर जैसे तैसे समय काट रहे थे । सभी एक दूसरे से विछड़ चुके थे । जिस ईश्वर ने हम सब को अलग अलग कर दिया था ,उसी ने आज हम सब को एक ही स्थान में मिला दिया है ।

जब वह जगदीश्वर चाहते हैं ,तभी कोई किसी से मिलता है और विछुड़ता है । किसके साथ किसका कितने दिन सम्बन्ध रहेगा , ये सब उस जगदीश्वर के हाथ में है । यहां कोई भी जीव न तो जीने में स्वतन्त्र है और न ही मरने में स्वतन्त्र है ।

न किसी के साथ रहने मिलने में स्वतन्त्र है और न ही दूर होने में स्वतन्त्र है । न सुखी होने में स्वतन्त्र है और न ही दुख दूर करने में स्वतन्त्र है ।

क्यों कि यह शरीर , यह सम्बन्ध ,यह संसार हमारा बनाया हुआ नहीं है । इसलिए न तो अपने को अभागी मानना चाहिए और न ही सौभाग्यशाली मानना चाहिए ।
भगवान जो हमें निमित्त बना देते हैं , वही हम बन जाते हैं ।हम सभी जीव भगवान के खिलौने हैं । ऐसा सोचकर ही आनन्द में रहना चाहिए ।

*-आचार्य ब्रजपाल शुक्ल , वृन्दावन धाम*

पपीते के पत्ते कैंसर को सिर्फ 35 से 90 दिन में सही कर सकते हैं।

पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90 दिनों में कर देगी जड़ से खत्म, पपीते के पत्ते 3rd और 4th स्टेज के कैंसर...