Tuesday, 28 January 2014

"गौ भक्ति का चमत्कार "


--------------------------------- वर्तमानकाल में भौतिकता की और प्रवृत मानव यदपि गो-सेवा की महिमा को नहीं समझते, तथापि इधर जो अनुभव हुए है, उनके आधार पर गौके शरीर में सभी देवताओं का निवास मानना पड़ता है | आयुर्वेदप्रवीण वैधराज लक्ष्मणसिंह जी की धर्मपत्नी श्रीमती गंगाकौर का देहावसान ५ अक्टूबर १९६० को हुआ | देहावसान के छ: मास पूर्व इन्होने वैधराज को बता दिया की यदपि शारीरिक रूप से मैं पूर्ण स्वास्थ्य हूँ, तथापि मेरा अंतिम समय निकट है | वैसे तो वैधराज परम धार्मिक हैं, परन्तु पत्नी की इस बात पर वे पूर्ण विश्वाश नहीं कर पाये | मृत्यु के दो मास पूर्व श्रीमति गंगाकौर ने पुन: अपनी मृत्यु-तिथि बतलाई और स्वयं पूर्णत: हरिभक्त और गौ-सेवा में लग गयी | २३ सितम्बर ६० को किसी बात के प्रसन्ग में यही बात फिर दोहराई गयी | मृत्यु के दो दिन पूर्व ही ॐ का पाठ चलता रहा | निश्चित समय पर श्रीमती गंगाकौर चेतनाशून्य हो गयी | वैध जी ने कस्तुरी आदि औषधियों की सहायता से उन्हें पुन: चैतन्य-अवस्था में लाकर पुछा - 'देवी ! योगी यतियों के लिए भी दुर्बोध मृत्यु के आगमन का पूर्वभास तुम्हे कैसे हुआ ?' श्रीमति गंगाकौर ने ने उत्तर दिया -'यह सब गौ-सेवा का प्रताप है | मुझे ऐसा आभास हो रहा है की मैं सीढ़ियों पर जा रही हूँ | कुते और कुत्तों जैसे प्राणी मुझ पर झपट रहे है और गौ-समुदाय घेरा बना कर मेरी रक्षा कर रहा है | एक प्राणी मुझे कह रहा है की गाय तेरी रक्षा कर रही है, इसलिए तू जा और तेरे पतिकी शंका-निवारण कर आ |' ऐसा कह कर उन्होंने आथणी (दही ज़माने की हांडी) मंगवायी और सारा दही गौ-पुत्री (वत्सा) को खिलाने का आदेश दिया | फिर उन्होंने कहाँ की मेरी माताजी आयेंगी और विकल होकर रोयेंगी | आप उन्हें रोने-कलपने से मना कर दीजिये और कहिये की वे 'राम' या 'ॐ' का नाम का पाठ करे | गाय का दही खाते-खाते वे चिर-निंद्रा में लीं हो गयी | गोसेवा के चमत्कार (सच्ची घटनाएँ), संपादक - हनुमानप्रसाद पोद्दार, पुस्तक कोड ६५१, गीताप्रेस गोरखपुर, भारत

गाय का घी(देशी भारतीय नस्ल की गौ माता )


गाय के घी को अमृत कहा गया है। जो जवानी को कायम रखते हुए, बुढ़ापे को दूर रखता है। काली गाय का घी खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है। गाय के घी से बेहतर कोई दूसरी चीज नहीं है।
दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ढीक होता है।
सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करे, सर दर्द ठीक हो जायेगा।
नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तारो ताजा हो जा
ता है।
गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है।
हाथ पाव मे जलन होने पर गाय के घी को तलवो में मालिश करें जलन ढीक होता है।
20-25 ग्राम घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांझे का नशा कम हो जाता है।
फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है।
गाय के घी की झाती पर मालिश करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायक होता है।
सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा।
अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें।
गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है।
जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाइ खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, हर्दय मज़बूत होता है।
यह स्मरण रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन संतुलित होता है यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।
गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है।
देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है।
गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।
गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है।
गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बहार निकल कर चेतना वापस लोट आती है।
गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है।
गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है।
गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ठीक हो जाता है
गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है।
विशेष :-स्वस्थ व्यक्ति भी हर रोज नियमित रूप से सोने से पहले दोनों नशिकाओं में हल्का गर्म (गुनगुना ) देसी गाय का घी डालिए ,गहरी नींद आएगी, खराटे बंद होंगे और अनेको अनेक बीमारियों से छुटकारा भी मिलेगा।

पपीते के पत्ते कैंसर को सिर्फ 35 से 90 दिन में सही कर सकते हैं।

पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90 दिनों में कर देगी जड़ से खत्म, पपीते के पत्ते 3rd और 4th स्टेज के कैंसर...