Saturday, 25 March 2017

gau hatya in hindi

यूपी के 36 सबसे बड़े स्लाटर हाउस के मालिक जैन और हिन्दू  हैं !

आज कल जिस तरह से कतल खाना बंद होने से एक वर्ग विशेष को निशाना बनाया जा रहा है,दरसल सच्चाई कुछ और ही है,इनका बीफ बिज़नेस कुल बिज़नेस का लगभग 70/80% है लेकिन इनके नाम आपको इस अंदाज़ में मिलेंगे जैसे मुस्लिम कंपनी हो, वजह साफ है इनका बिज़नेस ज़्यादातर अरब व खाड़ी देशों में है इसलिए मुस्लिम नाम रखना इनकी मजबूरी है, हो सकता दिखावे के लिए 1/2% के शेयर धारक मुसलमान भी जोड़े हुए हों इन कंपनियों ने,

तो क्या इन स्लाटर हाउस में मिलने वाला बीफ शाकाहारी है..? या ये बीफ बग़ैर जानवर क़त्ल किये उत्पादित किया जाता है..?
योगी जी.. अपने पार्टी अध्यक्ष की ज़बान से निकला चुनावी वादा पूरा कीजिए और सबसे पहले इन 36 कंपनियों को बंद करके दिखाइये..!!
ज्यादा नहीं सिर्फ 36 स्लाटर हाउस के मालिकान बीफ एक्सपोर्टर हैं यूपी में। फिलहाल इन्हें बंद करने का आदेश करिए प्रभु। सूची चीन के नत्थी वीजा की तरह साथ लगा रहा हूं।

1) Exports Pvt. Ltd.
11 KM Stone,Village Alipur
Jajwana, Distt Meerut, U.P
2) M/s. Amroon Foods Pvt. Ltd. 1310/6,7,9,11 Kursi-Agrase Road, Kursi, Distt. Barabanki (u.p.)
3) M/s. ALM Industries Ltd., Kh.No.460, Village Harora, Ahtmal, Dehradun Rd Saharanpur (U.P.)
4) M/s Indagro Foods Ltd., Plot No.B-1-5, U.P.S.ID.C., Industrial Area, Site-2, Unnao (U.P.)
5) M/s Hind Agro Industries Ltd., CDF Complex, Aupshahr Road, Aligarh-202122
6) M/s Al Noor Exports Village: Shernagar 9 th Km Jansath Road Dist: Muzaffarnagar Uttar Pradesh
7) M/s H.M.A. Food Exports Kuberpur , Agra Plot NO.293, 295,297 Village Kuberpur The. Etamadpur Agra
8) M/s Al-Hamd Agro Food Products (P) Ltd., Village Udla Ilyaspur, P.O. Sarol, G.T. Road, Aligarh
9) M/s J.S. International B-32 to B-47, Leather Technology Park, Industrail Area, Banthar, Unnao
10) M/s. Fair Exports India (P) Ltd. (Formerly known as M/s. Giex Foods Pvt. Ltd. Vill Ahmednagar Pahari, Tehsil, Sadar Dist. Rampu
11) M/s. Al- Nafees Frozen Food Exports Pvt. Ltd., Hasanpur Bus Stop, Hapur Road, Dasna Distt., Ghaziabad (U.P.)
12) MCD Slaughter House Integrated Fright Complex, Pocket B, Behind Poultry Market, Ghazipur, Delhi 110092 Leased to Frigorifico Allana Ltd., A-15, Site IV, Industrial Area, Sahibabad, Ghaziabad (U.P.)
13) M/s Eagle Continental Foods Pvt. Ltd. Khasra No. 1876, Post Office Hindon Nagar Dasna, Ghaziabad
14) M/s India Frozen Foods Village, Begumpur, Chimyawali, Sambhal (Moradabad)- U.P.
15) M/s Chaudhary Skin Trading Company D-34, Site-B, Surajpur Industrial Area, Gautam Budh Nagar, U.P
16) M/s Al- Faheem Meatex (P) Ltd. Khasra No- 38, 39, 41, 42, 63 etc. Village Dhikli, Hapur Road, Meerut – 250004
17) M/s. H.M.A. Agro Industries Ltd., 6/1, 15-16, Village –Talaspur, Tehsil Kaol, Mathura Bye pass Road, Aligarh
18) M/s. Frigerio Conserva Allana Ltd. Plot No 14/1, Village – Talaspur Khur Tehsil Koil, Mathura By pass road, Aligarh, U.P. & Plot No 182, Amarpur Kondla Tehsil Koil, Mathura By pass Road, Aligarh, Uttar Pradesh
19) M/s Al-Tabarak Frozen Foods (P) Ltd. Mathura Bye Pass Road Village Mullapara, Bhujpura Distt. Aligarh
20) M/s. Rustam Foods Pvt. Ltd. E, 28, Industrial Area, Site No. 1, Unnao
21) M/s AOV Exports Pvt. Ltd. Plot No. D-1 & D- 2, Industrial Area , Site –I, Unnao, Kanpur (U.P.)
22) M/s. A.Q Frozen Foods Pvt. Ltd. Kunda Feeder Road, Bachrao, Distt. J.P Nagari, UP
23) M/s. Al – Dua Food Processing (P) Ltd. Village Amarpur Kodla, Tahsil Cole, Mathura By Pass Road, Distt. Aligarh (U.P.)

24) M/s. Modern Slaughter House (Agra Nagar Nigam), Plot No. 287, Vill.-Kuberpur, Tahseel Aitmadpur, Agra (Leased to M/s. Frigorifico Allana Ltd., A-15, Site IV, Industrial Area Sahibabad, Ghaziabad (U.P.)
25) M/s Rayban Foods Private Ltd., Rampur Marg, Bulanshahar Road, Hapur, U.P
26) M/s. Meem Agro Foods Pvt. Ltd. 993 to 1005, Kandhla Road, Kairana, DisttShamli, U.P.
27) M/s. Mash Agro Foods Ltd. Village Bichpuri, Tehsil-Hasanganj, Pargana Ajgain, Unnao-UP
28) Marya Frozen Agro Foods Pvt. Ltd. Mohanpur Sahajhanpur Road, Bareilly, U.P
29) M/s. AL Nasir Exports Pvt. Ltd., Plot No. 2761, Bhooragarhi, Dasna, Distt. Ghaziabad, U.P.
30) M/s. Hamd Foods Pvt. Ltd. C/o Al-Haq Foods, Village Bhojpur, Dharampura, Distt. Moradabad, U.P
31) M/s Laham Exports India Pvt. Ltd. 2, KM Stone, Moonda-Khera Road Khurja 20313 (U.P
32) M/s Omar International Pvt. Ltd., Khasra No. 47, 52 & 54 Village Yaqoobpur, P.O. Sahaspur, District Bijnor, UP.



 

Wednesday, 22 February 2017

chana benefits

चना बादाम से भी ज्यादा फायदेमंद 
बादाम की तुलना में चना कम कीमत में ज्यादा फायदे देता है। इसलिए इसे गरीबों का बादाम भी कहा जाता है। वेजिटेरियंस के लिए चना प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। प्रोटीन के अलावा भी इसमें पोटैशियम,मैग्नीशियम और फॉलेट जैसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो हार्ट प्रॉब्लम और BP कंट्रोल करने में फायदेमंद है। डायटीशियन रूपाली तिवारी बता रही हैं चना खाने के 9 फायदे।
कमजोरी दूर करता है – चने में पाए जाने वाले आयरनप्रोटीन सहित ढेर सारे मिनिरल से बॉडी को एनर्जी और एंटीओक्सिडेंट मिलते है. इससे कमजोरी दूर होती है
हार्ट डिजीज से बचाता है – चने में पाए जाने वाले अल्फा लिनोलेनिक एसिड और ओमेगा 3 फैटी एसिड कोलेस्ट्रोल कम करते हैं और हार्टअटैक से बचाते हैं
अच्छी नींद लाता है – चने में पाए जाने वाले अमोनिया एसिडस ट्रायपटोफेन और सेरोटोनिन अच्छी नींद लाने में मदद करते हैं
एनिमिया में फायदा करता है – चने में काफी मात्रा में आयरन पाया जाता है जिससे एनीमिया जैसी प्रॉब्लम में फायदा होता है
बोनस मजबूत करता है – चने में दूध और दही के समान कैल्शियम पाया जाता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है
किडनी की सफाई करता है – चने में भरपूर मात्रा में फास्फोरस पाया जाता है जो कि हिमोग्लोबिन का लेवल बढ़ाता है और किडनी से एक्स्ट्रा सोल्ट बाहर निकलता है
टेंशन और स्ट्रेस दूर करता है – चने में अमीनो एसिड्स ट्रायपटोफेन और सेरोटोनिन पाए जाते हैं जो टेंशन और स्ट्रेस दूर करते हैं
डायबिटीज कंट्रोल करता है – चना ग्लायसेमिक इंडेक्स में काफी नीचे है इसमें पाए जाने वाले फाइबर और प्रोटीन से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करते हैं
पीलिया में फायदा करता है – चने में मौजूद मिनरल और आयरन पीलिया की बीमारी में काफी फायदा करते हैं
स्किन डिजीज इस में फायदा करता है – चने में फॉस्फोरस और मैगनीज ऐसे मिनरल होते हैं जो रिंगवार्म और खुजली जैसी स्किन डिजीज इस में पैदा करते हैं

Saturday, 18 February 2017

vegetarian meaning in hindi

आप क्यों मासाहारी बनते हो
आमतौर पर नॉनेवज खाने वाले ये तर्क देते है कि इसमे प्रोटीन बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। कई वेज फूड ऐसे होते हैं जिनमें इतना प्रोटीन होता है जो हमारी रोज की जरूरत के लिए पर्याप्त है और हमें कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं जबकि मॉस खाने से कई साइड इफ़ेक्ट होते है।  दरअसल एलोपेथी डॉक्टर बहुत कहते है के अन्डे खाना बहुत आवश्यक है और उनका हिसाब किताब प्रोटीन वाला है. वो कहते है प्रोटीन इसमें ज्यादा है विटामिन A ज्यादा है । लेकिन वो ऐसा क्यों कहते है ?? क्योकि उन्होने अपनी किताबों मे पढ़ा है.  लेकिन क्यों पढ़ा है ?? दरअसल हमारे डॉक्टर जो पढाई करते है जैसे MBBS , MS, MD ये पूरी पढाई बाहर से आई है अर्थात यूरोप से आयी है और यूरोप के देशों मे साल के 8 महीने तो बर्फ होती है खाने-पीने की प्राकृतिक चीजें उनके पास ज्यादा है नहीं और जो है वो सब हमारे यहाँ से जाती है जैसे फल ,सब्जियाँ आयुर्वेदिक ओषधियाँ आदि
अब वहाँ जो लोग होंगे जब कभी एलोपेथी चिकित्सा की किताबें लिखी गई होंगी उनके पास मांस और अन्डे के इलावा और कुछ नही होगा । तो उनकी जो पुस्तके है उनमे वो ही लिखा जायेगा जो वहाँ उपलब्ध है । और यूरोप में पूरा इलाका बहुत ठंडा है !सब्जी होती नही , दाल होती नही हैं ! पर अंडा बहुत मिलता है कियोंकि मुर्गियां बहुत है । अब हमारे देश में भी वो ही चिकित्सा पढ़ा रहे है क्यूंकि आजादी के 67 साल बाद भी कोई कानून बदला नहीं गया ! पर उस चिकित्सा को हमने हमारे देश की जरुरत के हिसाब से बदल नही किया.  अर्थात उन पुस्तकों में बदवाल होना चाहिए, उसमे लिखा होना चाहिए भारत में अन्डे की जरुरत नही है क्योकि भारत में अन्डे का विकल्प बहुत कुछ है । पर ये बदवाल हुआ नही और हमारे डॉक्टर वो पुस्तक पढ़ कर निकलते है और बोलते रहते है अन्डे खाओ मांस खाओ । आयुर्वेद की पढाई पढ़ कर जो डॉक्टर निकलते है वो कभी नही कहते के अन्डे खाओ । अन्डे में प्रोटीन है पर सबसे ज्यादा प्रोटीन तो उड़द की दाल में है, फिर चने की डाल, मसूर की डाल, अन्डे में विटामिन A हैं पर उससे ज्यादा दूध में है ।
एक वयस्क पुरुष के लिए जरूरी प्रोटीन : 56 ग्राम प्रति दिन
एक वयस्क महिला के लिए जरूरी प्रोटीन : 46 ग्राम प्रति दिन
अब हम बता रहे है 10 ऐसे प्रोटीन रिच फूड जो प्योर वेजिटेरियंस के लिए एकदम परफेक्ट हैं।
कद्दू के बिज – इसमे 100 ग्राम में 30 ग्राम प्रोटीन होता है. ये डायबिटीज से बचाव करता है
तिल – 100 ग्राम में 26 ग्राम प्रोटीन होत्ता है. ये वजन कम करने में मददगार है
चने की दाल – 100 ग्राम में 25 ग्राम प्रोटीन होत्ता है. इससे डाईजेशन इम्प्रूव होता है
मूंगफली – 100 ग्राम में 24 ग्राम प्रोटीन होत्ता है. ये हार्ट प्रॉब्लम से बचाव करती है
काबुली चना – 100 ग्राम में 19 ग्राम प्रोटीन होत्ता है. इसको खाने से चहरे पर ग्लो बढेगा
बादाम- 100 ग्राम में 21 ग्राम प्रोटीन होत्ता है. इसके सेवन से मसल्स मजबूत होते है
मुंग की दाल – 100 ग्राम में 24 ग्राम प्रोटीन होत्ता है. इसके सेवन से हेयर फॉल की प्रॉब्लम दूर होती है
राजमा – 100 ग्राम में 24 ग्राम प्रोटीन होत्ता है. इसके सेवन से कब्ज की प्रॉब्लम सही होती है

Saturday, 11 February 2017

cow dung fertilizer

एक गाय के गोबर  से पांच एकड़ में  खेती, 
खाद न कीटनाशक, उपज भी अधिक
पटना.धनश्यामपुर (दरभंगा) के उसराही सुपौल के चंद्रवीर यादव ने प्राकृतिक खेती की। पहले एक एकड़ में दो-तीन हजार रुपए रासायनिक खाद और कीटनाशक पर खर्च करने पड़ते थे। अब बिना खर्च के ही बेहतर उपज मिली। प्रयोग के तौर पर कुछ खेतों में इस तरह से खेती की। अब इन्होंने तय किया कि अगले वर्ष से सभी पांच एकड़ खेत में यही विधि अपनाएंगे। इस विधि से बैंगन की खेती में भी कीटनाशक का प्रयोग नहीं करना पड़ा और खूब उपज मिली। इस जिले के उमेश कुमार राय व रामदेव यादव भी इस विधि से खेती करते हैं।
 फसल की मिलेगी अधिक कीमत : हींग लगे न फिटकरी, रंग चढ़े चोखा। शून्य लागत पर प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए यह कहावत सच साबित हो रही है। बिना रासायनिक खाद व कीटनाशक के प्रयोग के सिर्फ गोबर व गोमूत्र के प्रयोग से अनाज व सब्जी का अधिक उत्पादन मिलने लगा है। अपने पास अगर एक गाय है, तो पांच एकड़ तक खेती के लिए खाद की चिंता नहीं रहेगी। बस गोबर और गुड़ से ही फसल लहलहाएगी। गुणवत्तापूर्ण अधिक उत्पादन भी मिलेगा।
पूर्ण प्राकृतिक खेती से फसल की कीमत भी अधिक मिलेगी। इस प्रकार से उगाई गई फसलों के सेवन से आप जहर खाने से बच जाएंगे। मिट्टी की उर्वरता भी बरकरार रहेगी। जीव-जंतु भी नष्ट नहीं होंगे। पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और अपना स्वास्थ्य भी। धान की खेती के लिए तीन से चार बार गोबर, गोमूत्र, गुड़ व दाल के आटे का घोल छिड़काव कर बिना खाद के उपज ली जा सकती है। गेहूं, गन्ना, दलहन व सब्जी की खेती में भी यह प्रयोग उपयोगी है।
एक ग्राम गोबर में 300-500 करोड़ सूक्ष्म जीवाणु : एक ग्राम गाय के गोबर में 300-500 करोड़ सूक्ष्म जीवाणु पाए जाते हैं। गाय के गोबर में गुड़ व अन्य पदार्थ डालकर किण्वन (फरमेंटेशन) से सूक्ष्म जीवाणु बढ़ाकर तैयार किया जीवामृत या घन जीवामृत जब खेत में पड़ता है, तो सूक्ष्म जीवाणु भूमि में उपलब्ध तत्वों से पौधों का भोजन निर्माण करते हैं।

ऐसे करें प्रयोग

बीजामृत बीज शोधन: 5 किलो गोबर, 5 लीटर गोमूत्र, 50 ग्राम चूना, एक मुट्ठी मिट्टी, 20 लीटर पानी में मिला कर 24 घंटे रखें। दिन में दो बार लकड़ी से घोलें। इसे 100 किलो बीजों पर उपचार करें। छांव में सूखा कर बोएं।
जीवामृत : जीवामृत पौधों के लिए भोजन तैयार करते हैं। गोमूत्र 5 से 10 लीटर, गोबर 10 किलो, गुड़ एक से दो किलो, दलहन आटा एक से दो किलो, 100 ग्राम जीवाणु युक्त मिट्टी, 200 लीटर पानी मिलाकर ड्रम को जूट की बोरी से ढक कर छाया में रखें। सुबह-शाम डंडा से घड़ी की सूई की दिशा में घोलें। 48 घंटे बाद छान कर सात दिनों के अंदर प्रयोग करें। एक एकड़ में 200 लीटर जीवामृत पानी के साथ छिड़काव करना चाहिए। पहला छिड़काव बुआई के एक माह बाद एक एकड़ में 100 लीटर पानी 5 लीटर जीवामृत मिला कर।
दूसरा 21 दिनों बाद एक एकड़ में 150 लीटर पानी व 10 लीटर जीवामृत मिला कर। तीसरा व चौथा छिड़काव 21-21 दिन बाद एक एकड़ में 200 लीटर पानी व 20 लीटर जीवामृत मिलाकर दें। आखिरी छिड़काव दाने की दूध की अवस्था में प्रति एकड़ में 200 लीटर पानी, 5-10 लीटर खट्टी छाछ मिला कर छिड़काव करना चाहिए।
घन जीवामृत : गोबर 100 किलो, गुड़ एक किलो, दाल का आटा एक किलो, मिट्टी 100 ग्राम पांच लीटर गोमूत्र मिला कर 48 घंटे छाया में बोरी से ढककर रखें। इसके बाद छाया में ही फैलाकर सुखाएं। इसे छह माह तक प्रयोग कर सकते हैं। एक एकड़ में एक क्विंटल घन जीवामृत देना चाहिए।
बिहार में प्राकृतिक कृषि अभियान की कमेटी बनी है। इसके माध्यम से 9 मई को एकदिवसीय प्रशिक्षण पटना में होगा, जिसमें विभिन्न जिलों से किसानों को बुलाकर प्रशिक्षित किया जाएगा। जून में एक सप्ताह तक प्रत्येक प्रखंड से दो-दो किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस तकनीक के प्रवर्तक सुभाष पालेकर किसानों को प्रशिक्षित करेंगे।
संतोष कुमार, प्राकृतिक कृषि अभियान
यह विधि सफल है। छोटे पैमाने पर इस विधि से खेती तो हो सकती है, लेकिन बड़े पैमाने इस तकनीक के प्रयोग के लिए गोबर और गोमूत्र की उपलब्धता की समस्या आ सकती है।
डॉ. उज्ज्वल कुमार, प्रधान वैज्ञानिक आईसीएआर

Thursday, 9 February 2017

neem ki datun benefits


नेता और  क्रिकेट खिलाडी  देश बेच रहे हैं 

आई आई टी  मैं एक व्याख्यान में एक  लड़का खड़ा हो गया कहने लगा क्या राजीव भाई क्या उलटी उलटी बात करते हैं एक ही नीम के दातुन को हम कितनी बार करें तो मैंने कहा भाई जरा एक बताओ 1 टूथ ब्रश को कितनी बार करते हो एक दिन करते हैं धो के रख देते हैं दूसरे दिन करते हैं फिर धो के रख देते हैं साल भर तक रगड़ते रहते हैं 1 टूथ ब्रश तो गंदा नहीं लगता और एक नीम का दातुन मैं कह रहा हूं हफ्ते भर रगड़ो तो गंदा लगता है 
तो उस लड़के ने जानते हैं क्या जवाब दिया सच में राजीव भाई हमारा दिमाग तो एकदम उल्टा हो गया है मैंने कहा यह दिमाग तुम्हारा उल्टा पता किसने बनाया टेलीविजन ने उसको तुम टेलीविज़न कहते हो मैं उसको इडियट बॉक्स कहता हूं 
और क्या इडियोसिटी दिखाता है जानते हैं दो पति-पत्नी साथ चल रहे हैं थोड़ी देर के बाद पत्नी मुंह फेर लेती है कहती  है कैसे कहूं इनकी सांस में बदबू आती है तो उसकी सहेली कहती है चल मेरे साथ दोनों डॉक्टर के पास जाते हैं डॉक्टर साहब कहते हैं अरे कोलगेट का सुरक्षा चक्र अपनाया नहीं सांस में बदबू तो आएगी फिर उनके घर में कोलगेट आ जाता है उनके मिस्टर जिनकी सांस में बदबू आती है वो कोलगेट रगड़ते हैं कोलगेट रगड़ने के बाद दिखाते हैं उनकी पत्नी उनके नजदीक आ जाती है नीचे एक लाइन लिखते हैं दूरियां नजदीकियां बनी
जानते हैं इसका मतलब क्या है इसका मतलब है दो पति-पत्नी अगर कोलगेट नहीं करेंगे तो दूर-दूर रहेंगे कोलगेट करेंगे तभी नजदीक आएंगे अब आप मुझे बताइए कि इससे इडियोसिटी कोई दूसरी हो सकती है
 भारतीय संस्कृति में पति पत्नी का रिश्ता परस्पर प्रेम परस्पर विश्वास परस्पर सद्भाव पर टिका होता है टेलीविजन सिखा रहा है कि नहीं कोलगेट पेस्ट पर टिका हुआ है और इसीलिए इस हंड्रेड परसेंट इडियोसिटी से बाहर आ जाइए फायदा जानते हैं क्या होगा अगर आप नीम  का दातुन खरीदें 
हम सब 1 साल में कितना पेस्ट खरीदने हैं मालूम है सारे देश में 200-250 करोड़ का पेस्ट खरीदा जाता है साल भर में अगर यह दौ सौ ढाई सौ करोड़ का नीम  का दातून खरीदना शुरू कर दें तो इस देश के कितने गरीबों को काम मिल जाएगा 
और तब आप कहेंगे राजीव भाई अगर हम सब नीम  का दातुन करना शुरु करें तो नीम का झाड़ तो खत्म हो जाएगा तब मैं आपको एक दूसरा फॉर्मूला देकर जा रहा हूं कि आपका जब जन्मदिन होता है ना तो क्या करते हैं कि केक लेकर आते हैं मोमबत्ती जलाते हैं फिर फु फु फु फु फूंक मार के सब बुझाते  हैं  
हमारी भारतीय संस्कृति में दीपक कब बुझाया जाता है जब किसी की मौत हो जाए हम क्या करते हैं जन्मदिन पर ही दीपक बुझा रहे हैं माने मरने की तैयारी कर रहे हैं तो आप अगर मुझसे पूछे कि राजीव भाई जन्मदिन कैसे मनाए उसका बेस्ट फार्मूला मैं आपको देकर जा रहा हूं जब भी आपका जन्मदिन आए तो संकल्प करिए कि हम हमारे जन्मदिन पर एक नीम का झाड़ लगाएंगे पेड़ लगाएंगे और मान लीजिए आपके 50 जन्मदिन आए तो 50 झाड लगेंगे 
और एक नीम का झाड़ जब बन जाता है तो साल भर में 15 लाख रुपए की ऑक्सीजन देता है एक नीम का झाड तो हमने अगर 50 नीम के पेड़ लगाए अपने हर जन्मदिन पर तो 50 x1500000 माने कितना-सिंगल साढ़े 7 करोड़ रुपए की ऑक्सीजन किसने दी हमने जो नीम का झाड लगाया 
अब मैं आपसे ऐसे कहूं कि साढ़े 7 करोड़ करोड़ रुपया देश को दान करिए आप कहेंगे है ही नहीं हमारे पास और अगर यह मैं कैसे कहूं कि साढ़े 7 करोड़ करोड रुपए की ऑक्सीजन दान करिए वह हम सब कर सकते हैं एक एक नीम का झाड़ लगाए आपके देश में दातून की भरमार हो जाएगी और दातुन की भरमार के साथ-साथ ऑक्सीजन भी इफरात में हो जाएगी कि पर्यावरण का प्रदूषण एक झटके से खत्म हो जाएगा यह तो यह बेस्ट फार्मूला है दातुन करें दातुन के लिए एक नीम का झाड़ लगाए और अपने हर जन्मदिन पर लगाएं हिंदुस्तान की यह जो पर्यावरण की समस्या है इसका अभी समाधान हो जाएगा और यह जो 200-250 करोड रुपए बर्बाद हो जाते हैं टूथपेस्ट खरीदने में वह बच जाएंगे
ऐसे ही एक आखिरी सुझाव और एक परदेसी कंपनी आई है वह पानी बेचती है पेप्सी कोला कोका कोला थम्स  अप लिम्का और यह जितना पानी है ना सब की बोतल पर आपको मालूम है क्या क्या मिलाते हैं कभी नहीं बताते क्यों नहीं बताते क्योंकि उसमें जहर मिलाते हैं जहर पता है क्या है कार्बन डाइऑक्साइड मेडिकल साइंस कहता है कि कार्बन डाइऑक्साइड को exhale करना चाहिए और ऑक्सीजन inhale करना चाहिए हम क्या करते हैं लहर pepsi पी के कार्बन डाइऑक्साइड अंदर ले जाते हैं माने दोस्तों जो लहर पेप्सी है वह सच में जहर पेप्सी है और यह जो जेहर पेप्सी क्यों है क्योंकि इसमें कार्बन डाइऑक्साइड है दूसरी दो चीजें और हैं जो बहुत खतरनाक है सोडियम ग्लूटामेट और पोटेशियम सोर्बेट यह दोनों जहर है दोनों कैंसरस हैं
और यह कितना खतरनाक हो सकता है इसके दाखिला (उदहारण) में आपको दूँ, 1 साल पहले मैं आया था ग्रांट रोड के कॉलेज में मेरा एक व्याख्यान था तो वहां के प्रिंसिपल साहब ने मुझे बताया राजीव भाई हमने एक कंपटीशन किया मैंने कहा  क्या कंपटीशन किया पेप्सी कोला पीने का कंपटीशन किया 
मैंने कहा परिणाम क्या निकला तो कहने लगे हमारे दो स्टूडेंट थे वो फाइनल राउंड में पहुंच गए तो फाइनल राउंड में पहुँच गए तो क्या उन्होंने शूरवीरता दिखाई की एक 1 घंटे में एक लड़के ने 9 बोतल पिया और दूसरे ने 8 बोतल पिया मैंने कहा फिर क्या हुआ उसके बाद की दोनों मर गए मैंने कहा फिर आपने क्या किया कि हम डॉक्टर को लेने गए उन लड़कों को लेकर डॉक्टर के पास गए डॉक्टर ने कहा इतना कार्बन डाइऑक्साइड पी लिया है कि अब यह बच नहीं सकते तो मैंने कहा फिर आपने क्या किया तबसे हमने हमारी कैंटीन में पेप्सी और कोका कोला बंद करा दिया मैंने कहा प्रिंसिपल साहब आपको अकल तो आई लेकिन तब आई जब आप के दो स्टूडेंट मर गए 
यह इतना खतरनाक जहर है और एक बार मैंने एक्सपेरिमेंट किया पेप्सी कोला पे मेरा एक दांत टूट गया तो मैंने उसको पेप्सी कोला की बोतल में डाल दिया 9 दिन के अंदर पूरा दांत Disolve हो गया यह जो दांत होता है ना इतनी कड़ी चीज है कि मिट्टी में दबा दीजिए एक साल तक गलता नहीं है ऐसे का ऐसे निकल आएगा लेकिन वह दांत 9 दिन के अंदर पेप्सी कोला में घुल गया है क्यों क्योंकि जहर है उसमें और मैंने कहा कि जब दांत इसमें घुल सकता है तो पेट का क्या-क्या गलेगा जब आप उसको पी रहे हैं 
और सब लोग पेप्सी जब पीते हैं कोका कोला पीते हैं तो मैं लोगों से पूछता हूं कि मैंने कभी पिया नहीं कभी-कभी मैं मेरे दोस्त से कहता हूं कि भाई तुमको क्या लगता है जब तुम पेप्सी पीते हो राजीव भाई नाक में सनसनी होती है दिमाग में सनसनी होती है खट्टी खट्टी डकारे आती है मैंने कहा काहे को पी रहे हो फिर भाई इतनी प्रॉब्लम हो रही है फिर भी बोतल पे बोतल चढ़ाए चले जा रहे हैं क्योंकि पी रहे हैं मालूम है सचिन तेंदुलकर कहता है अजरुद्दीन कहता है शाहरुख खान कहता है आमिर खान कहता है जूही चावला कहती है ऐश्वर्या राय कहती है और यह सब क्यूँ कहते हैं जानते हैं लाखों लाखों करोड़ों करोड़ों की रिश्वत मिलती है इनको पेप्सी कोला से सचिन तेंदुलकर हर साल पेप्सी कोला से 70 लाख रुपए लेता है इसके लिए उसका धन्दा करता है 
यह शाहरुख खान और आमिर खान यह एक एक करोड़ लेते हैं इसलिए पेप्सी कोला का धन्दा करते हैं यह जितने क्रिकेट खिलाड़ी हैं जिनको आप नेशनल प्लेयर कहते हो यह सब विदेशी कंपनियों के एजेंट हैं दोस्त्तों हर एक क्रिकेट खिलाड़ी जो टी शर्ट पहनता है उस पर पेप्सी लिखा रहता है विल्स लिखा रहता है अब आप पूछिए यह प्रश्न यह तो हिंदुस्तानी लोग हैं विदेशी कंपनी की विज्ञापन क्यों कर रहे हैं तो आपको पता चलेगा कि यह बड़े-बड़े गद्दार लोग हैं सचिन तेंदुलकर को हर महीने 50 हजार रूपये पगार मिलती है हमारे खून पसीने की कमाई से यह पगार हम उसको क्यों देते हैं क्रिकेट खेलने के लिए उसमें भी उसका पेट नहीं भरता तो विदेशी कंपनी का विज्ञापन करता है 
यह नेता ही देश बेचने में नहीं लगे हुए हैं यह क्रिकेट के खिलाडी भी देश बेच रहे हैं और यह रात दिन जानते हैं क्या हो रहा है हिंदुस्तान की क्रिकेट टीम दो ही कंपनी का सबसे ज्यादा विज्ञापन करती है पेप्सी कोला यां विल्स और यह दोनो कंपनियां क्या नुकसान कर रही है पेप्सी कोला हर साल हिंदुस्तान से 240 करोड रुपए कमा कर ले जाता है अमेरिका|
जहर बेचते हैं और यहां से 240 करोड अमेरिका  चला जाता है और उस 240 करोड़ में क्या हो सकता है आपको मालूम है हिंदुस्तान के 2 लाख गांवों को पीने का पानी मिल सकता है इस देश में आजादी के 50 साल के बाद 2 लाख गांवों में पीने का पानी नहीं है यह सरकार के आंकड़े हैं मेरे नहीं है और करोड़ों करोड़ों लोग पीने के पानी से प्यासे हैं गुजरात में मैंने मेरी आंखों से देखा है कछ में इतनी जबरदस्त पानी की कटौ कटी है कि एक एक घड़ा पानी लेने के लिए 15 15 किलोमीटर बहने पैदल पैदल चलकर जाती हैं ( राजीव दीक्षित के  व्याख्यान )

Wednesday, 8 February 2017

home treatment for malaria


मच्छर कैसे भगाये ??
 मच्छर भगाने के लिए आप अक्सर घर मे अलग अलग दवाएं इस्तेमाल करते हैं ! कोई तो liquid form मे होती हैं ! और कोई कोई coil के रूप मे और कोई छोटी टिकिया के रूप मे !

 और all out ,good night, baygon, hit जैसे अलग-अलग नामो से बिकती है ! इन सबमे जो कैमिकल इस्तेमाल किया जाता है  वो डी एथलीन है,मेलफो क्वीन है और फोस्टीन है !! ये तीन खतरनाक कैमिकल है ! 

और ये यूरोप मे अन्य 56 देशो मे पिछले 20 -20 साल बैन है ! और हम लोग घर मे छोटे-छोटे बच्चो के ऊपर ये लगाकर छोड़ देते हैं ! 2-3 महीने का बच्चा सो रहा होता है ! और साथ मे ये जहर जल रहा होता है 

TV विज्ञापनो ने आम व्यक्ति का दिमाग पूरा खराब कर दिया है ! वैज्ञानिको का कहना है ये मच्छर मारने वाली दवाए कई कई बार तो आदमी को ही मार देती हैं !! इनमे से निकलने वाली सुगंध मे धीमा जहर है जो धीरे – धीरे शरीर मे जाता रहता है !!और कई बार आपने भी महसूस किया होगा इसे सुघने से गले मे हल्की-हल्की जलन होने लगती है !


ये जो तीन खतरनाक कैमिकल डी एथलीन है मेलफो क्वीन है और फोस्टीन है ! इन पर कंट्रोल विदेशी कंपनियो का है ! जो आयात कर यहाँ लाकर बेच रहे है ! और कुछ स्वदेशी कंपनिया भी इनके साथ इस व्यपार मे शामिल है ! और इन कंपनियो के द्वारा बनाई गई coil मे से जो धुआँ निकलता है वो भी बहुत अधिक खतरनाक है
 अभी एक दो वर्ष पहले की रिपोर्ट मे बताया गया एक coil से 100 सिगरेट जितना धुआँ निकलता है सोचिए ! ,मच्छर भगाना आपको आपके परिवार को कितना महंगा पर सकता है !
तो आप से निवेदन है कभी भी इसका इस्तेमाल न करे !! आप कहेंगे फिर मच्छर कैसे भगाये ??
सबसे आसान उपाय है ! आप मच्छरदानी का प्रयोग करे ! सस्ती है ! स्वदेशी है ! पूर्व से पश्चिम उत्तर से दक्षिण सब जगह उपलब्ध है ! और आज कल तो अलग अलग तरह की मिल रही है ! एक गोल प्रकार की है ! एक ऊपर ओढ़ कर सोने जैसी भी है !!
और इससे भी एक बढ़िया उपाय है ! नीम का  तेल बाजार से ले आए ! और उसको दीपक मे डाल कर बत्ती बना कर जला दे ! जबतक दीपक जलेगा ! एक भी मच्छर आस पास नहीं फटकेगा  !! एक लीटर नीम का तेल 2 से 3 महीने चल जाता है !!
और सबसे बढ़िया एक और काम आप कर सकते है ! गाय के गोबर से बनी धुप  या अगरबत्ती ले ! उसको जलाए सब मच्छर भाग जाएँगे ! आजकल काफी गौशाला वाले गोबर से बनी धूप  अगरबत्ती आदि बना रहे ! आसानी से आपको उपलब्ध हो जाएगी ! अपने आस-पास  की गौ शाला से पता करें !
और आप अगर ये अगरबत्ती आदि खरीदेंगे तो पैसा किसी न किसी गौशाला को जाएगा ! गौ शाला को पैसा जाएगा  तो गौ माता की रक्षा होगी ! गौ माता की रक्षा होगी तो भारत माता की रक्षा होगी !! दूसरे जहर खरीदेंगे तो एक आपका पैसा बर्बाद होगा और दूसरा आपका अनमोल शरीर 
और जो ये liquid जहर बाजार बिकते हैं कितने महंगे है जरा देखिए!
45 ml 55 रु का
तो 90 ml 110 रु का
1 लीटर लगभग 1200 रूपये !
तो आप गौ माता के गोबर से बनी हर्बल मच्छर धूपबत्ती  जलाएं मच्छर भगाये ! अपने निकटतम किसी भी गौशाला मे संपर्क करें ! 
किसी कारण वहाँ से ना मिले तो इस नंबर पर सम्पर्क कर मँगवा सकते हैं ! 
कीमत मात्र 40 रू प्रति पैकेट(10 धूपबत्ती )
व्रजराज गौशाला  -9009363221,  9407001528 
www.vedikindia.com
1200 रूपये लीटर जहर खरीदने से अच्छा है 40 रूपये मे गौ माता के गोबर से बनी हर्बल धूपबत्ती खरीदे !

Friday, 3 February 2017

mitti ke bartan in hindi


मिटटी के बर्तन में भोजन पकाये और स्वस्थ रहे 
घी भी मिट्टी की हांडी से ही निकालती थी दही का मट्ठा भी मिट्टी की हांडी में बनता था अब मेरी समझ में आया कि हजारों साल से मिट्टी के बर्तन क्यों इस देश में आए हम भी एल्युमीनियम बना सकते थे देखिए बात  मैं  आपसे कहने जा रहा हूं की हिंदुस्तान भी 2000 साल पहले 5000 साल पहले एल्युमीनियम बना सकता था क्योंकि एलुमिनियम का रो मटेरियल इस देश में भरपूर मात्रा में है बॉक्साइट.  हिंदुस्तान में बॉक्साइट के भरपूर खजाने भरे पड़े हैं कर्नाटक बहुत बड़ा भंडार तमिलनाडु आंध्र प्रदेश बॉक्साइट के बड़े भंडार है हम भी बना सकते थे अगर बॉक्साइट है तो एल्युमीनियम बनाना कोई मुश्किल काम नहीं है लेकिन हमने नहीं बनाया क्योंकि उसकी जरुरत नहीं थी हमको जरुरत थी मिट्टी की हांडी इसलिए हमने मिट्टी की हांडी बनाई और उसी पर सारे रिसर्च और एक्सपेरिमेंट किए इसलिए कुमारों की एक पूरी की पूरी जमात इस  देश में खड़ी की गई थी तुमको भईया मिट्टी के ही बर्तन बनाने हैं माने तुमसे बड़ा वैज्ञानिक कौन अब यह कुमार जो  इतने  बड़े वैज्ञानिक हैं इस देश के जो मिट्टी के बर्तन बनाकर हजारों साल से दे रहे हैं हमारे स्वास्थ्य की रक्षा  करने के लिए हमने उनको नीची जाति बना दिया हम कैसे मुर्ख लोग वह नीचे कहां है जरा बताइए अगर प्रेशर कुकर की कंपनी जो बना रही है प्रेशर कुकर वो ऊंचा आदमी है तो यह कुमार नीचा कैसे हो गया यह ऊंचा नीचा हमने डाल दिया इस देश में इसी ने देश का सत्यानाश कर दिया


यह ऊंचा नीचा कुछ तो अंग्रेजों ने डाला और कुछ अंग्रेजों के पहले जो मुसलमान थे उन्होंने डाला और कुछ अंग्रेज और मुसलमानों के जाने के बाद हम काले अंग्रेजों ने इसको ऐसा पक्का बना दिया कि कुमार इस देश में  बैकवर्ड क्लास है जो सबसे बड़ा वैज्ञानिक काम कर रहा है मिट्टी के बर्तन बना बना के आप के माइक्रो न्यूट्रीएंट्स को आप के सूक्ष्म पोषक तत्वों को कम नहीं होने देने के लिए मिट्टी का सिलेक्शन करता है वो आपको मालूम है की हर एक मिट्टी से बर्तन नहीं बनते एक खास तरह की मिट्टी है वही बर्तन बनाने में काम आती है और एक खास तरह की मिट्टी है जो हांडी बनाती है दूसरे खास तरह की मिट्टी है जिससे कुल्लड बनता है तीसरे खास तरह की मिट्टी में कुछ और बनता है यह मिट्टी को पहचानने कि इसमें कैल्शियम ज्यादा है इसमें मैग्नीशियम ज्यादा है कि इसलिए हांड़ी इस से बनाओ
इसमें  मैग्नीशियम कम है इसलिए इसका कुल्हड़ बनाओ यह तो बहुत बहुत बारीक और विज्ञान का काम है यह सब कुम्हार कर रहे हैं हजारों सालों से कर रहे हैं बिना किसी यूनिवर्सिटी में पड़े हुए कर रहे हैं तो हमें तो वंदन करना चाहिए उनके सामने नतमस्तक होना चाहिए कितने महान लोग हैं दुर्भाग्य से सरकार की कैटेगिरी में वह बैकवर्ड  क्लास में आते हैं तो यह जो मिट्टी के बर्तन की बात हुई वह मिट्टी के बर्तन की बात इसलिए कि माइक्रो न्यूट्रीएंट्स का सब कुछ सामान्य रहता है इसलिए हमारे यहां मैलीनियम के बर्तन या दूसरे मेटल के बर्तन का चलन कम है भगवान के लिए तो बनाते नहीं धातु के बर्तन में खाना नहीं बनता सभी मंदिरों में भोजन और प्रसाद ज्यादातर मिट्टी के बर्तन तो आप भी कर लीजिए यह काम प्रेशर कुकर निकालिए मिट्टी की हांडी ले आए  तो आप कहेंगे जी दाल देर में पकेगी सिद्धांत ही वही है दाल का तो जो देर में खेत में पक्की है वह देर में घर में भी पकेगी तो आप बोलेंगे कि टाइम मैनेजमेंट कैसे होगा मैं आप को सरल बता देता हूं
दाल को हांडी में रखकर चढ़ा दीजिए बाकी सब काम करते रहिए घंटे डेड घंटे में पक जाएगी उतार लीजिए फिर खा लीजिए घंटे डेड  घंटे में आपके झाड़ू पोछा दूसरे बर्तन साफ करना कपड़े साफ करना या जो भी काम  करना है पढ़ना लिखना बच्चों को पढ़ाना तो करते रहिए वो दाल पकती रहेगी यह है बागवट जी का सूत्र कि ऐसा भोजन नहीं करना जो बनाते समय पकाते समय सूर्य के प्रकाश से वंचित हो और पवन के स्पर्श से वंचित हो यह तभी संभव है जब आप खुले बर्तन में खाना बनाएं तो पवन भी अंदर आए सूर्य का प्रकाश की किरणें भी अंदर आए खुले बर्तन में और वह खुला बर्तन सबसे अच्छा मिट्टी का हांडी
आप कहेंगे कि अगर मिट्टी की हांडी के बाद अगर कोई कोई चीज है तो हमारे यहां एक मैटल बनता है जिसको आप लोग कहते हैं एलाय है कांसा कांसा आपने सुना है शायद देखा भी हो किसी के घर में तो दूसरा सबसे अच्छा माना जाता है कांसा  तीसरा सबसे अच्छा माना जाता है पीतल अब यह कांसा और पीतल में भी हमने काम कर लिया की अरहर की दाल को कांसे के बर्तन में पकाएं तो उसके सिर्फ 3% माइक्रो न्यूट्रीएंट्स कम होते हैं 97% मेंटेन रहते हैं पीतल के बर्तन में पकाएं तो 7% कम होते हैं 93 परसेंट बचे रहते हैं लेकिन प्रेशर कुकर में बनाएं तो सिर्फ 7% बचते हैं बाकी खत्म हो जाते हैं
अब आप तय कर लीजिए कि आपको लाइफ में क्वालिटी चाहिए तो आपको मिट्टी की हांडी की तरफ ही जाना पड़ेगा क्वालिटी ऑफ लाइफ की अगर आप बात करेंगे तो माने जो खा रहे हैं वह पूरे शरीर में पोषकता दे यह लाइफ की क्वालिटी की बात करेंगे तो मिट्टी की हांडी की तरफ ही जाना पड़ेगा माने भारत की तरफ वापस लोटना पड़ेगा इंडिया से अभी हम हैं इंडिया में जो बनाया अंग्रेजों ने या बना दिया अमेरिकियों ने इस इंडिया से निकलकर भारत की यात्रा करनी पड़ेगी
और मैंने पिछले एक दो वर्षों में ये बातें गांव-गांव में कहना शुरू किया है तो इसका परिणाम पता क्या की कुम्हारों की इज्जत बढ़ गई है गांव में गांव वाले यह समझते हैं कि यह तो कोई बड़ा काम कर रहे हैं हमारे लिए और मैं मानता हूं कि मेरे व्याख्यान कि अगर कोई सार्थकता है तो यह कुम्हारों की इज्जत इतनी बढ़ जाएगी कि वह पंडितों के बराबर आ जाएं क्योंकि वह किसी से नीचे नहीं है क्योंकि वह किसी से छोटे नहीं हैं भले वह मिट्टी के बर्तन बना रहे हैं बहुत वैज्ञानिक काम हो कर रहे हैं और मजे की बात की वो हांड़ी बनाकर सिर्फ 20 25 रूपये  में ही दे रहे हैं प्रेशर कुकर तो 250 – 300 रूपये का है और और सबसे मजे की बात जब हांडी खत्म होगी माने इसके लाइफ पूरी हो जाएगी तो यह हांडी फिर मिट्टी में मिल जाएगी फिर वही मिट्टी से हांडी बन जाएगी
राजीव दिक्षित के व्याख्यान  

Tuesday, 31 January 2017

Low blood pressure

राजीव दीक्षित- लो ब्लड प्रेशर 
प्राणायाम :-  

1) भ्रामरी,
2) शशकासन,
3)  ॐ उच्चारण ,
4) लम्बी श्वास प्राणायाम (उज्जायी)
5) सूर्य नमस्कार !

प्रात: का भोजन :- 
1) भीगा चना, टमाटर, ककड़ी सेंधा नमक के साथ 

2) नर्इ मूली + सेंधा नमक मिलाकर खाना
3) परवल , मूंग, कुलत्थ की भाजी
4) पुराने चावल का प्रयोग


शाम का भोजन :-  मूंग + चावल की खिचड़ी (सेंधा नमक) डालकर !

पथ्य :-  पुराना चावल, गेहूँ, आम, अनार, सेंधा नमक, केला, प्रात: काल नंगे पैर 
घाँस पर घूमना । 

अपथ्य :-  ज्यादा तनाव, वेग धारण, मैदे वाले सभी पदार्थ।


रोग मुक्ति के लिये आवश्यक नियम  : 

पानी के सामान्य नियम : 

१) सुबह बिना मंजन/कुल्ला किये दो गिलास गुनगुना पानी पिएं । 
२) पानी हमेशा बैठकर घूँट-घूँट कर के पियें । 
३) भोजन करते समय एक घूँट से अधिक पानी कदापि ना पियें, भोजन समाप्त होने के डेढ़ घण्टे बाद पानी अवश्य पियें । 
४) पानी हमेशा गुनगुना या सादा ही पियें (ठंडा पानी का प्रयोग कभी भी ना करें। 


भोजन के सामान्य नियम : 

१) सूर्योदय के दो घंटे के अंदर सुबह का भोजन और सूर्यास्त के एक घंटे पहले का भोजन अवश्य कर लें । 
२) यदि दोपहर को भूख लगे तो १२ से २ बीच में अल्पाहार कर लें, उदाहरण - मूंग की खिचड़ी, सलाद, फल और छांछ । 
३) सुबह दही व फल दोपहर को छांछ और सूर्यास्त के पश्चात दूध हितकर है । 
४) भोजन अच्छी तरह चबाकर खाएं और दिन में ३ बार से अधिक ना खाएं । 


अन्य आवश्यक नियम : 

१) मिट्टी के बर्तन/हांडी मे बनाया भोजन स्वस्थ्य के लिये सर्वश्रेष्ठ है । 
२) किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल और सोयाबीन, कपास, सूर्यमुखी, पाम, राईस ब्रॉन और वनस्पति घी का प्रयोग विषतुल्य है । उसके स्थान पर मूंगफली, तिल, सरसो व नारियल के घानी वाले तेल का ही प्रयोग करें ।  
३) चीनी/शक्कर का प्रयोग ना करें, उसके स्थान पर गुड़ या धागे वाली मिश्री (खड़ी शक्कर) का प्रयोग करें । 
४) आयोडीन युक्त नमक से नपुंसकता होती है इसलिए उसके स्थान पर सेंधा नमक या ढेले वाले नमक प्रयोग करें । 
५) मैदे का प्रयोग शरीर के लिये हानिकारक है इसलिए इसका प्रयोग ना करें । 

Monday, 30 January 2017

Cow dung benefits

गोबर से घरेलु उपचार 

वातावरण की शुद्धता में, धुप आदि में मुख्यतः गोबर का उपयोग किया जाता है. प्राचीनकाल से घर की पुताई करने के लिए गोबर का उपयोग होता है. 


गोबर सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों को सोख लेता है. जिसके कारण इन किरणों से हम सुरक्षित रहते है. 


 अतः घर तथा परिसर में गोबर से पुताई करने से वातावरण शुद्धि के साथ-साथ, सूर्य किरणों की तीव्रता से बचाव हो सकता है. 


श्वासरोग (दमा/अस्थमा) में गोबर का रस निकालकर नाक में दो-दो बूँद डालने से तत्काल लाभ होता है 


गोबर की केवल गन्ध लेने से नाक से रक्त आना बन्द होता है 


गोबर में विटामिन बी 12 अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है 


पतले दस्त/डायरिया की अवस्था में गोबर का रस पीने से शीघ्र लाभ होता है 


समस्त प्रकार के दांत के विकार में गोबर की राख  का मंजन  रूप में उपयोग लाभदायक होता है 


गोबर एक सहज, सुलभ प्राप्त कीटाणुनाशक है 


Wednesday, 18 January 2017

bartan called in english

ऐल्यूमीनियम के बर्तन से कर्इ प्रकार के गंभीर रोग

हमारे देश में एल्यूमिनियम के बर्तन 100-150 साल पहले ही आये हैं उससे पहले धातुओं में पीतल, काँसा, चाँदी, फूल आदि के बर्तन ही चला करते थे और बाकी मिटटी के बर्तन चलते थे। 


अंग्रेजों ने जेलों में कैदियों के लिये ऐल्यूमीनियम के बर्तन शुरु किये क्योंकि उसमें से धीरे-धीरे विष हमारे शरीर में जाता है। ऐल्यूमीनियम के बर्तन के उपयोग से कर्इ प्रकार के गंभीर रोग होते हैं जैसे अस्थमा, वात रोग, टी.बी. शुगर आदि ।

 पुराने समय में फूल और पीतल के बर्तन होते थे जो स्वास्थ्य के लिये अच्छे माने जाते हैं यदि संभव हो तो वही बर्तन फिर से लेकर आयें, हमारे पुराने वैज्ञानिकों को मालूम था कि एल्यूमीनियम बाक्साइट से बनता है और भारत में इसकी भरपूर खदानें हैं फिर भी उन्होंने एल्यूमीनियम के बर्तन नहीं बनाये 

क्योंकि यह भोजन बनाने और खाने के लिए सबसे घटिया धातु है इससे अस्थमा, टी.बी., वात रोग में बढ़ावा मिलता है इसलिये एल्यूमीनियम के बर्तनों का उपयोग बन्द करें ।.

Friday, 13 January 2017

jaivik khad kya hai

जैविक खाद का चमत्कार 

इस बार गौशाला में भारतीय देशी गौवंश से प्राप्त गोबर से जैविक खाद का निर्माण किया और फसल आप स्वयम देख कर अंदाज लगाए की रासायनिक जहर में और देशी खाद में क्या फर्क है
यह तस्वीर  जैविक खाद की फसल की है और नीचे रासायनिक खाद  तस्वीर है
एक ही दिन बुआई की गयी और फर्क दिख रहा है

इस बार जैविक खेती की है


गौ मूत्र फिनायल बनाने की विधि (केमिकल रहित)

             *सामग्री* गौ मूत्र      *एक लीटर* नीम पत्र    *200 ग्राम सूखा* पाइन आयल इमल्सीफायर युक्त     *50 ग्राम* उबाला हुआ पा...